मुसलमानो आओ पुरानी रिवायत और क़ुरान के इल्म की रौशनी में गौरक्षा का अभियान छेड़ो और बंद करवाओ गाय का क़त्ल और यदि इस अभियान में राष्ट्रवादी हिन्दू संगठन का साथ लेना पड़े तो गुरेज़ नहीं।
भारत में गौ हत्या को रोकने के नाम पर मुसलमानों को निशाना बनाया जाता रहा है अलकबीर नाम के स्लाटर हाउस में हर रोज़ हजारों गाय काटी जाती हैं कुछ साल पहले हिन्दू संगठनों ने इसके ख़िलाफ़ मुहिम भी छेड़ी थी, लेकिन जब यह पता चला कि इसका मालिक कोई मुसलमान नहीं, बल्कि गैर मुस्लिम यानी जैनी है तो आन्दोलन को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया यह जगज़ाहिर है कि गौहत्या से सबसे बड़ा फ़ायदा गौ तस्करों और गाय के चमड़े का कारोबार करने वाले बड़े कारोबारियों को ही होता है।
इन वर्गों के दबाव के कारण ही सरकार गौहत्या पर पाबंदी लगाने से गुरेज़ करती है। वरना दूसरी क्या वजह हो सकती है कि जिस देश में गाय को माता के रूप में पूजा जाता हो, उस देश की सरकार गौहत्या को रोकने में नाकाम है।
क़ाबिले-गौर है कि भारत में मुस्लिम शासन के दौरान कहीं भी गौवध को लेकर हिन्दू और मुसलमानों में टकराव का वाकिया देखने को नहीं मिलता। अपने शासनकाल के आखिरी साल में जब मुगल बादशाह बाबर बीमार हो गया तो उसके प्रधान ख़लीफा निज़ामुद्दीन के हुक्म पर सिपाहसालार मीर बकी ने गैर मुस्लिमों को परेशान करना शुरू कर दिया। जब इसकी ख़बर बाबर तक पहुंची तो उन्होंने क़ाबुल में रह रहे अपने बेटे हुमायूं को एक पत्र लिखा। बाबरनामे में दर्ज इस पत्र के मुताबिक़ बाबर ने अपने बेटे हुमायूं को नसीहत करते हुए लिखा- ''हमारी बीमारी के दौरान मंत्रियों ने शासन व्यवस्था बिगाड़ दी है, जिसे बयान नहीं किया जा सकता। हमारे चेहरे पर कालिख पोत दी गई है, जिसे पत्र में नहीं लिखा जा सकता। तुम यहां आओगे और अल्लाह को मंजूर होगा तब रूबरू होकर कुछ बता पाऊंगा। अगर हमारी मुलाकात अल्लाह को मंजूर न हुई तो कुछ तजुर्बे लिख देता हूं जो हमें शासन व्यवस्था की बदहाली से हासिल हुए हैं, जो तुम्हारे काम आएंगे-
1. तुम्हारी जिन्दगी में धार्मिक भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। तुम्हें निष्पक्ष होकर इंसाफ करना चाहिए। जनता के सभी वर्गों की धार्मिक भावना का हमेशा ख्याल रखना चाहिए।
2. तुम्हें गौहत्या से दूर रहना चाहिए। ऐसा करने से तुम हिन्दोस्तान की जनता में प्रिय रहोगे। इस देश के लोग तुम्हारे आभारी रहेंगे और तुम्हारे साथ उनका रिश्ता भी मजबूत हो जाएगा।
3. तुम किसी समुदाय के धार्मिक स्थल को न गिराना। हमेशा इंसाफ करना, जिससे बादशाह और प्रजा का संबंध बेहतर बना रहे और देश में भी चैन-अमन कायम रहे।''
हदीसों में भी गाय के दूध को फ़ायदेमंद और गोश्त को नुकसानदेह बताया गया है।
1. उम्मुल मोमिनीन (हज़रत मुहम्मद साहब की पत्नी) फ़रमाती हैं कि नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद सलल्लाह फ़रमाते हैं कि गाय का दूध व घी फ़ायदेमंद है और गोश्त बीमारी पैदा करता है।
2. नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद सलल्लाह फरमाते हैं कि गाय का दूध फ़ायदेमंद है। घी इलाज है और गोश्त से बीमारी बढ़ती है। (इमाम तिबरानी व हयातुल हैवान)
3. नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद सलल्लाह फ़रमाते हैं कि तुम गाय के दूध और घी का सेवन किया करो और गोश्त से बचो, क्योंकि इसका दूध और घी फ़ायदेमंद है और इसके गोश्त से बीमारी पैदा होती है। (इबने मसूद रज़ि व हयातुल हैवान)
4. नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद सलल्लाह फ़रमाते हैं कि अल्लाह ने दुनिया में जो भी बीमारियां उतारी हैं, उनमें से हर एक का इलाज भी दिया है। जो इससे अनजान है वह अनजान ही रहेगा। जो जानता है वह जानता ही रहेगा। गाय के घी से ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक कोई चीज़ नहीं है। (अब्दुल्लाबि मसूद हयातुल हैवान)
भारत में गौ हत्या को रोकने के नाम पर मुसलमानों को निशाना बनाया जाता रहा है अलकबीर नाम के स्लाटर हाउस में हर रोज़ हजारों गाय काटी जाती हैं कुछ साल पहले हिन्दू संगठनों ने इसके ख़िलाफ़ मुहिम भी छेड़ी थी, लेकिन जब यह पता चला कि इसका मालिक कोई मुसलमान नहीं, बल्कि गैर मुस्लिम यानी जैनी है तो आन्दोलन को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया यह जगज़ाहिर है कि गौहत्या से सबसे बड़ा फ़ायदा गौ तस्करों और गाय के चमड़े का कारोबार करने वाले बड़े कारोबारियों को ही होता है।
इन वर्गों के दबाव के कारण ही सरकार गौहत्या पर पाबंदी लगाने से गुरेज़ करती है। वरना दूसरी क्या वजह हो सकती है कि जिस देश में गाय को माता के रूप में पूजा जाता हो, उस देश की सरकार गौहत्या को रोकने में नाकाम है।
क़ाबिले-गौर है कि भारत में मुस्लिम शासन के दौरान कहीं भी गौवध को लेकर हिन्दू और मुसलमानों में टकराव का वाकिया देखने को नहीं मिलता। अपने शासनकाल के आखिरी साल में जब मुगल बादशाह बाबर बीमार हो गया तो उसके प्रधान ख़लीफा निज़ामुद्दीन के हुक्म पर सिपाहसालार मीर बकी ने गैर मुस्लिमों को परेशान करना शुरू कर दिया। जब इसकी ख़बर बाबर तक पहुंची तो उन्होंने क़ाबुल में रह रहे अपने बेटे हुमायूं को एक पत्र लिखा। बाबरनामे में दर्ज इस पत्र के मुताबिक़ बाबर ने अपने बेटे हुमायूं को नसीहत करते हुए लिखा- ''हमारी बीमारी के दौरान मंत्रियों ने शासन व्यवस्था बिगाड़ दी है, जिसे बयान नहीं किया जा सकता। हमारे चेहरे पर कालिख पोत दी गई है, जिसे पत्र में नहीं लिखा जा सकता। तुम यहां आओगे और अल्लाह को मंजूर होगा तब रूबरू होकर कुछ बता पाऊंगा। अगर हमारी मुलाकात अल्लाह को मंजूर न हुई तो कुछ तजुर्बे लिख देता हूं जो हमें शासन व्यवस्था की बदहाली से हासिल हुए हैं, जो तुम्हारे काम आएंगे-
1. तुम्हारी जिन्दगी में धार्मिक भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। तुम्हें निष्पक्ष होकर इंसाफ करना चाहिए। जनता के सभी वर्गों की धार्मिक भावना का हमेशा ख्याल रखना चाहिए।
2. तुम्हें गौहत्या से दूर रहना चाहिए। ऐसा करने से तुम हिन्दोस्तान की जनता में प्रिय रहोगे। इस देश के लोग तुम्हारे आभारी रहेंगे और तुम्हारे साथ उनका रिश्ता भी मजबूत हो जाएगा।
3. तुम किसी समुदाय के धार्मिक स्थल को न गिराना। हमेशा इंसाफ करना, जिससे बादशाह और प्रजा का संबंध बेहतर बना रहे और देश में भी चैन-अमन कायम रहे।''
हदीसों में भी गाय के दूध को फ़ायदेमंद और गोश्त को नुकसानदेह बताया गया है।
1. उम्मुल मोमिनीन (हज़रत मुहम्मद साहब की पत्नी) फ़रमाती हैं कि नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद सलल्लाह फ़रमाते हैं कि गाय का दूध व घी फ़ायदेमंद है और गोश्त बीमारी पैदा करता है।
2. नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद सलल्लाह फरमाते हैं कि गाय का दूध फ़ायदेमंद है। घी इलाज है और गोश्त से बीमारी बढ़ती है। (इमाम तिबरानी व हयातुल हैवान)
3. नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद सलल्लाह फ़रमाते हैं कि तुम गाय के दूध और घी का सेवन किया करो और गोश्त से बचो, क्योंकि इसका दूध और घी फ़ायदेमंद है और इसके गोश्त से बीमारी पैदा होती है। (इबने मसूद रज़ि व हयातुल हैवान)
4. नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद सलल्लाह फ़रमाते हैं कि अल्लाह ने दुनिया में जो भी बीमारियां उतारी हैं, उनमें से हर एक का इलाज भी दिया है। जो इससे अनजान है वह अनजान ही रहेगा। जो जानता है वह जानता ही रहेगा। गाय के घी से ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक कोई चीज़ नहीं है। (अब्दुल्लाबि मसूद हयातुल हैवान)
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