आज की राजनीती
बीजेपी की प्रयोगशाला में यह सफल परीक्षण के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे है की भारत की विभिन्न जातियों में धुर्वीकरण करो जैसे मुसलमानो में शिया-सुन्नी में धार्मिक धारणाओं के बीच विभाजन एवं टकरार मसलन ३ - तलाक़ का मामला, सुन्नी में इस प्रथा में मान्यता है शिया नहीं मानता २. शिया समुदाय को धार्मिक मतो के आधार पर सुन्नी समुदाय से भिन्नता पैदा कर वोटो का धुर्वीकरण ३. लखनऊ जो शिया समुदाय का मरकज़ हैं वहाँ शिया धर्म गुरुओ का सत्ता पक्ष के प्रति रुझान इसके संकेत दे रहे है। ४. बाबरी मस्जिद विवाद में शियो का प्रस्ताव और उनकी पहल शिया - सुन्नी विवाद की बुनियाद साबित होगा।
सत्ता पक्ष पिछले कुछ समय से हिन्दू-मुस्लमान दंगा कराने में सफल नहीं हो पा रहे है उसका मुख्य कारण दलितों का सत्ता पक्ष से मोह-भंग उससे निपटने के किये दलितों पर बड़ी जातो का उत्पीड़न बढ़ गया है और उन्हें डरा-धमका कर अपने पाले में लाने के प्रयास बढ़ गये है बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व का दलित परिवार में भोजन करना उन्हें पुनः अपने साथ जोड़ने का एक प्रयास है। दलित समाज में नेतृत्व का आभाव जो कुछ हद तक युवा जैसे जिग्नेश, चंद्रशेखर की भूमिका अहम हो जाती है। बहन मायावती यह बर्दाश नहीं करेगी की नेतृत्व की बागड़ोर युवा के हाथो में जाये और वो कारन बनेगा दलित समाज के वोटो के धुर्वीकरण का।
पाकिस्तान या चीन से कंट्रोल्ड युद्ध की सम्भावना कम है मगर नाकारा भी नहीं जा सकता यदि पाकिस्तान का सिविल कण्ट्रोल अस्थिर होता है तो हो सकता है दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व अपनी आवाम को मुर्ख बनाने हेतु ऐसा करे मगर सम्भावना कम है। २०१९ का चुनाव बीजेपी केवल और केवल जातीय समीकरण, बेईमानी और उन्माद पैदा कर जीत सकती है याद रहे मौजूदा सरकार को ३१% वोट मिले थे यदि २% वोट इधर-उधर हो गये तो काफी उलट-फेर हो सकता हैं इससे बचने के लिए मेरी राय में कानूनी प्रावधानों में बदलाव कर सकते है क्योकि राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति के आलावा उच्च न्यायालय में भी इनका समर्थक आ चूका है। एक साल दस महीना दिलचस्प होगा ऊंट किस करवट बैठता है।
