USCIRF और भारत
नरेंद्र मोदी सरकार के लिए एक घोर निराशा, जिसे अपना सबसे करीबी दोस्त होने की हामी भरते थे जिसे रिझाने के लिए १० लाख का सूट पहना और अपनों से उसपर हुई आलोचना के शिकार हुये उसी के अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF), अमेरिकी सरकार आयोग है, ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में, धर्म परिवर्तन और अल्पसंख्यकों के बारे में अपमानजनक बयान पर भारतीय जनता पार्टी के 'घर वापसी' अभियान की आलोचना की है जिसने बीजेपी के विभिन्न स्तर के नेता शामिल थे।
रिपोर्ट के अनुसार "Incidents of religiously-motivated and communal violence reportedly have increased for three consecutive years. The states of Andhra Pradesh, Uttar Pradesh, Bihar, Chattisgarhi, Gujarat, Odisha, Karnataka, Madhya Pradesh, Maharashtra, and Rajasthan tend to have the greatest number of religiously-motivated attacks and communal violence incidents. Non-governmental organizations (NGOs) and religious leaders, including from the Muslim, Christian, and Sikh communities, attributed the initial increase to religiously-divisive campaigning in advance of the country’s 2014 general election" यह कथन है गुरुवार को जारी की गयी अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) २०१५ वार्षिक रिपोर्ट का।
भारत में सत्तारूढ़ पार्टी की आलोचना करते हुए रिपोर्ट में कहा: "चुनाव के बाद से, धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े हुए राजनेताओं और कई हिंदू राष्ट्रवादी समूहों द्वारा हिंसक हमलों का शिकार बनाया गया और ज़बरदस्ती रूपांतरण के लिये मजबूर किया गया, इस तरह से अपमानजनक टिप्पणी के अधीन कर दिया गया है।
रिपोर्ट में हालांकि, धार्मिक स्वतंत्रता के समर्थन में मध्य फरवरी में मोदी के बयान ने कहा कि "सकारात्मक विकास है।"
सरकार इस रिपोर्ट को सिरे से ख़ारिज कर रही है मगर इससे यह बात साफ़ हो जाती है कि अमेरिका का वीज़ा मिलना कूटनीतिक पहल है जिसका मोदी सरकार की कारगुज़ारी से कोई लेनादेना नहीं है।
