तीन तलाक़
सैकड़ो साल पहले भी अरब कारोबारी भारत आते और अपने साथ कालीन और मेवे इत्यादि तिजारत के लिये लाते उससे बेचने में काफी समय लग जाता और वह वेश्यावृत्ति को तर्जी न देकर समुन्द्री किनारों पर बसे गॉव में शादी कर लेते और कभी कभी उनको बरसो रहना होता था तो उन शेखो से बच्चे भी होते थे। लाये हुए सामान को बेच कर वे भारत से मसाले और दुसरी चीज़े अपने जहाज़ों में भरते और अपने परिवार से विदा हो अपने मुल देश रवाना हो जाते। इस दौरान उसकी पत्नी उसके बच्चे / बच्चो की देखभाल करती और उसके वापस आने की राह तकती। उस ज़माने में शायद ३ तलाक़ का प्रचलन नहीं था क्योकि ईमानदारी और खुदा का खौफ मौजुद था। कुछ सालो बाद जब वो फिर भारत आते तो उसी परिवार के पास रुकते जो उसका था और वापस जाने से पहले कई सालो के खर्चे के पैसे दे जाते।
आज भी केरला के समुद्र तट पर इस प्रकार के परिवार देखे जा सकते है। इतिहास यह भी बताता है की अपने जवान बच्चो को वे अपने कारोबार में भी बराबर का हिस्सेदार बनाते और प्रोत्साहित करते। शायद यही कारण था केरला में इस्लाम का प्रचार और प्रसार अधिक हुआ और खाड़ी देशों में रोज़गार के प्रति लालसा आज भी देखी जा सकती है।
समय बदला शेखो ने आंध्र प्रदेश का रुख किया वो आंध्र आते और हिन्दुस्तानी दलाल उनके रहने और खाने की व्यवस्था करते। दलालो का एक दुसरा समुह गॉव कस्बों में गरीब परिवार को सम्पर्क करता जिनके घरो में कम उम्र की खुबसूरत लड़किया होती उनको शेख की अमीरी और ख़ूबी के बारे में बताया जाता उनसे यह भी बताया जाता की यदि वे अपनी बेटी की शादी शेख से कर दे तो उसका जीवन सुधर जायेगा वह रानी की तरह महलो में रहेगी और शेख उनके घरो को पैसे हीरे-जवाहरात से भर देगा, ऐसा सुनहरा अवसर कम आता है मौके का फायदा उठाओ यह ख़ुदा की रहमत है शेख ने तुम्हारी बेटी पसन्द कर ली है इत्यादि। गरीबी से तंग परिवार दिल मार के ऐसे प्रस्ताव पर अधिकांश हामी भर देता। किराये के सड़क चाप मौलवी निकाह की रस्म अदा करवाते और वह कमसीन शेख की बीवी बन जाती,शेख अपने भारत प्रवास में अपनी वासना पुरी करता और फिर उसे अरब ले जाने का झाँसा दे अपने वतन वापस चला जाता। वह कमसीन कुछ दिन इन्तेज़ार करती और अपनी किस्मत और खुदा की मर्ज़ी मान बाकि की ज़िन्दगी युही गुज़ार देती।
समय और बदला और इन्टरनेट युग में देश और दुनिया ने प्रवेश किया चीज़े आसान हो गयी लोग अब अपनी प्रोफाइल इन्टरनेट पर डालने लगे इस आभासी दुनिया ने लोगो को ठगना शुरू कर दिया सोशल मीडिया पर प्रेम फिर मिलने की चाहत फिर शादी की बाते और अन्तः शादी। कन्या पक्ष को लड़के के विषय में वही मालुम होता जो उसकी फ़र्ज़ी प्रोफाइल पर दर्ज होता या लड़के के द्वारा बताया गया होता जो अधिकांश झुठ होता। लड़की प्रेम जाल में फस विवाह कर लेती कुछ महीनो सालो सब कुछ ठीक ठाक चलता फिर शुरू होती घरेलु हिंसा फिर वह दिन भी आ जाता जब हीरो अपनी ब्याहता से यह कह कर चला जाता की ऑफिस के काम से या कारोबार के काम से किसी दुसरे शहर जा रहा है और ५-६ दिनों में वापस आ जायेगा। मगर आता तलाक़ का मैसेज वह भी व्हाट्सप पर।
फिर बात वही है शादी की तो क्या रजिस्टर्ड करवाई, लड़के के परिवार और उसकी नौकरी/कारोबार के बारे में तफ्तीश की नहीं तो भुगतो मौलवी अपनी फीस ले कर निकल लिया लड़का भागे या रहे उसकी बला से।
३ तलाक़ और हलाला दो अगल चीज़ है-अमुमन देखा गया है ३ तलाक़ की प्रथा और उसका इस्तेमाल वह पुरुष करते है जो विदेशो में रहते हुए भारत की गरीब लड़की से उनके परिवार को धन दौलत की लालच दे कम उम्र की लड़की से शादी कर अपनी वासना पुरी कर वापस विदेश चले जाते है और ३ तलाक़ जैसी कुप्रथा का इस्तेमाल कर आज़ाद होना चाहते है।
मामला लालच और उसके दुष्परिणाम से सम्बंधित है लालच में शादी फिर तलाक़ फिर लालच में वापस उसी के पास जाने की चाहत यानि उसे दूसरे मर्द से शादी फिर सुहागरात फिर तलाक़ फिर इद्दत फिर पहले पति से शादी।
१. तलाक़ के बाद फिर उसी मर्द के पास जाने की ईक्षा
२. विदेशी से शादी क्यों
३. मौलवी की मिली भगत
४. उल्मा-कौंसिल की निष्क्रियता
५. बीजेपी का राजनैतिक मुद्दा
६. मुसलमानो में धुर्वीकरण की पुरज़ोर कोशिश