आतंकवाद का कहर
आतंकवाद आज सम्पूर्ण विश्व की त्रासदी के रूप में सामने आ रहा है, प्राय प्रतिदिन आतंकवाद से सम्बंधित समाचार पत्रो की सुर्खिया बन सभ्य समाज को डराने का काम करती है। दुनिया के समस्त विकसित देश और विकसित हो रहे देश इस से बचने के लिये अरबों रूपये सालाना खर्च करते है। आज भारत में आतंकवादी घटनाओ की वजह से जगह जगह स्कैनर ,मेटल डिटेक्टर लिए खड़े हुए गार्ड दिखना आम हो गया। ऐसा क्यों हुआ? कभी आपने विचार किया?
अभी हाल में पाकिस्तान में हुयी एक दुखद घटना ने हम सबको झकझोर कर रख दिया। सिंध प्रान्त की एक मस्जिद में हुए एक बम विस्फोट में ६० से जयादा लोग मारे गए और सैकड़ो घायल हो गए। शिया समुदाय को निशाना बना कर की गयी यह घटना अत्यंत निंदनीय है। पडोसी देश पाकिस्तान जो आतंकवादियों का सबसे बड़ा संरक्षक है बहुत हद तक हमारे देश में आतंकवादी घटनाओ के लिए भी जिम्मेदार है। लोग बस, ट्रेन में चलते हुए डरते हैं। ना जाने कहाँ बम फट जाए। पाकिस्तान की आतंकवादियों को संरक्षण देने की यही नीति अब उसके अपने घर में आग लगा रही है। पाकिस्तान में वहां के अल्पसंख्यक हिन्दू, ईसाई सिख इस आतंकवाद से ग्रसित हैं। हिन्दुओ की लड़कियों का अपहरण होना, उनका जबरदस्ती धर्म परिवर्तन और निकाह एक बहुत आम बात हो गयी है। दूसरी तरफ मुस्लिमो के उदारवादी सम्प्रदाय भी इस आतंकवाद का शिकार हो रहे हैं।
अहमदी, शिया, बरेलवी, सूफी, सम्प्रदाय के लोगो पर हमले ,उनके धार्मिक स्थलों पर आगजनी, बलवा, टारगेट किलिंग आतंकियों द्वारा हमला कर अंधाधुंध फायरिंग, आत्मघाती हमले करना बहुत आम हो गया है और मुसलमानो का एक सम्प्रदाय विशेष इसकी सरहाना करता दिखाई पड़ता है। इस बेकसूरो की हत्या को इस्लाम बचाने का नाम दिया जाता है जोकि इस्लाम की तालीम के विपरीत है। अपने आपको इस्लामी जगत का आदर्श कहने वाला पाकिस्तान आज एकमात्र ऐसा मुल्क है जहाँ सजदे में झुके हुए सर, नमाज पढ़ते लोगो की हत्या अपने आपको सच्चा मुसलमान कहने वाले लोगो के द्वारा ही हो रही। इसका क्या कारण है? इस बात को समझने की जरुरत है। पाकिस्तान की नीव ही नफरत के आधार पर रखी गयी थी। एक पाकिस्तानी चिंतक बाबर अयाज़ के अनुसार "पाकिस्तान के तो डी एन ए में ही गड़बड़ी है। मतलब शुरुआत ही गड़बड़ हुयी है। पाकिस्तान के सबसे महान नेता मुहम्मद अली जिन्ना जो सवयं एक शिया मुस्लिम थे, उनकी सोच थी कि जब पाकिस्तान बन जायेगा तो वहां मुस्लिम सुखी रहेंगे। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा कि जिस देश को वह बना रहे हैं वहां उन्ही के सम्प्रदाय के लोगो को मारा जायेगा, और सरकार भी उसे समर्थन देगी। पाकिस्तान में शिया सम्पूर्ण आबादी लगभग २० प्रतिशत हैं। प्राप्त आकड़ो पर नज़र डाले तो पता चलता है कि सन २००४ से शियो की होने वाली हत्या में इज़ाफ़ा हो रहा है यदि आकड़ो विश्लेषण करे तो २००१ से २०१५ तक ४०४ - हमले (जिसमे आत्मघाती हमले शामिल है), २३११ - घायल और ४२३३ की पुष्टि होती है। जब मुस्लिम ही अपने घर में मेहफ़ूज़ नहीं है तो अन्य अल्पसंख्यको जैसे हिन्दू, ईसाई, सिख की कौन सुध ले? अब सवाल ये है कि इन सब घटनाओ का जिम्मेदार कौन है तो जवाब है पाकिस्तानी सरकार, जिसने बहुत से आतंकी संगठनो को पूर्ण रूप से संरक्षण दे रखा है जैसे लश्कर ऐ झंगवी, जमात उद दावा, सिपाह ऐ सहाबा जैसे संगठन जो तेहरीख-ए-तालिबान की सरपरस्ती फल फूल रही है। लश्कर ऐ झनगवी का तो मुख्य कार्य ही शियाओ को मारना है। इसके पीछे कुछ विशेष सम्प्रदाय के लोगो का भी हाथ है। जिन्हे लगता है कि वही सच्चे मुस्लिम हैं बाकी सब बरेलवी, शिया, सूफी, अहमदी मुश्रिकी है इसलिए उन्हें मार कर ख़त्म कर देना चाहिए। पाकिस्तानी हुक्मरानो ने जानबूझकर कारगिल के युद्ध में शिया बहुमत वाली नॉर्थन लाईट इन्फेंट्री को भारतीय सेना से भिड़वा दिया। अभी क्वेटा के शिया हजारा समुदाय के लोगो को कई बार नरसंहार किया गया जिसमे मरने वालो की संख्या बहुत अधिक थी. शियाओ और दूसरे अल्पसंख्यक के साथ पाकिस्तान में होने वाले जुल्मो की लिस्ट बहुत लम्बी है। इसमें अभी तक लगभग दस हजार से जयादा लोग मारे गए। शिया लोग पाकिस्तान में अंदरुनी मुहाजिर बन गए। सूफियों और बरेलवियो पर हमले भी बहुत जयादा हुए हैं। मजारो पर भी बहुत बम फ़टे। सैकड़ो लोग मारे गए।
यह सिलसिला जिया उल हक़ ने शुरू किया जो १९७० के दशक में शुरू हुआ और वह वहाबी विचारधारा के दूत की हैसियत से पाकिस्तान का तानाशाह बना और उसने वहाबी विचारधारा का प्रचार और प्रसार किया। उसने सऊदी अरब की वहाबी फंडिंग से मिलने वाली इमदाद से बहुत सारे मदरसे बनाये। इन मदरसो में ऐसे रंगरूट तैयार करे गए जिन्हे बताया गया कि सिर्फ वही सच्चे मुसलमान हैं और बाकी फिरके-मुशरीकी हैं, इसलिए उन्हें सच्चे ईमान पर लाना हमारा मकसद है तथा इस्लामी शरिया को दुनिया में नफ़ीस करना हमारा मक़सद। अगर इसमें कोई भी फ़िरक़ा मानने से इंकार कर दे तो उसकी हत्या करने में घूरेज़ नहीं करना चाहिये। जिया उल हक़ के समय से शुरू हुआ वह सिलसिला अभी भी चल रहा है। और यही लोग हमारे देश भारत में आकर भी कत्लेआम करते हैं आतंक फैलाते हैं । ऐसे समय में हम इन्साफ पसंद लोगो को पाकिस्तानी सरकार द्वारा आतंकवादियों का संरक्षण बंद करने हेतु दबाव बनाना जरुरी है। । इन लोगो ने पूरी दुनिया में शांतिप्रिय मुस्लिमो एवं अन्य लोगो का जीना मुश्किल कर दिया है। इस शैतानी वहाबी विचारधारा का विरोध जरुरी है
निवेदक -इंडियन प्यूपिल अगेंस्ट टेररिज्म
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