शनिवार, 19 सितंबर 2015

सामाजिक धुर्वीकरण का ताज़ा उदाहरण अहमदाबाद



सामाजिक धुर्वीकरण का ताज़ा उदाहरण अहमदाबाद में देखने को मिला वह भी उस राज्य से जहा से प्रधानमंत्री आते है और "सब का साथ सबका विकास" का नारा और गुजरात मॉडल के आधार पर या तर्ज़ पर हिन्दुस्तान का विकास करने दावा करने वाली सरकार के राज्य में हिन्दू बाहुल्य छेत्र को हिन्दुस्तान और मुस्लमान बाहुल्य छेत्र को मिनी पाकिस्तान या पाकिस्तान के नाम से चिन्हित किया गया है यह मुस्लमान बाहुल्य वह इलाके है जहाँ २००२ के दंगो के उपरान्त बड़े पैमाने पर शहर के मुसलमानो के अस्थायी पुनर्वास किया गया था हिन्दू और मुस्लमान आबादी को विभाजित करने वाली सड़क को बॉर्डर का नाम दिया गया है टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार यह सड़क साझा स्थान है ना ही हिन्दुस्तान की है और नाहि पाकिस्तान की मुसलमानो की बड़ी आबादी जुहापुरा को मिनी-पाकिस्तान और हिन्दुओ की बड़ी आबादी वेजलपुर को विभाजित करती यह सड़क "वगह बॉर्डर" के नाम से चिन्हित की जाती है आश्चर्य की बात यह है की इस व्यवस्था को सरकारी दस्तावेज़ों में इसी प्रकार दर्ज किया गया है

यह मामला तब प्रकाश में आया जब एक विवाद को लेकर कुछ लोगो की रखीअल पुलिस ठाणे में बबलू अज़ीज़भाई और फैज़ान अज़ीज़भाई निवासी वात्वा - पाकिस्तान के नाम से प्राथमिकी दर्ज की गयी उसी प्रकार थाने नालासोपारा जहाँ ५०० के लगभग मुसलमानो की आबादी है और बिजली / पानी की सुविधा प्राप्त है उसे सरकारी दस्तावेज़ में छोटा पाकिस्तान के नाम पर दर्ज दिखाया गया है

इसी सन्दर्भ में साबरमती के किनारे बसाये गये ४००० परिवार जिसमे २५०० मुस्लमान और दूसरे ब्लॉक में पुनर्स्थापित किये गए १५०० परिवार हिन्दू और मुस्लमान दोनों है जिनका मकानो का आवंटन जाति के आधार पर किया गया है इसका निर्माण अहमदाबाद म्युनिसिपल कारपोरेशन ने पांच साल पहले किया था इस प्रकार समाज पूर्ण रूप से विभाजित है और हर समाज की कोशिश है की वह आत्मनिर्भर रहे और किसी भी प्रकार की निर्भरता रखे

रखीअल पुलिस निरीक्षक बरकत अली चावड़ा कहते है यह बड़ा सामान्य है वहां रहने वाले लोग भी पाकिस्तान के निवासियों के रूप में खुद की पहचान करवाते है और प्राथमिकी में पते के रूप में पाकिस्तान दर्ज करने का आदेश उन्हें पुलिस कंट्रोल रूम से प्राप्त हुआ था और आदेश के प्रतिपादन हेतु पकडे गए दोनों भाईयो के स्थानीय पते पर पाकिस्तान लिखा गया

इन दोनों आबादी के दरमियाँ एक इलाक़ा और है जिसमे हिन्दू-मुस्लमान मिल-जुल कर रहते है सरकारी दस्तावेज़ में इलाके का नाम दर्ज है "सद्भावना कॉलोनी" टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार पिछले साल पहले इस मौहल्ले में पथराव की घटना पेश आयी तो सरकार ने एक पुलिस चौकी स्थापित कर दी जो अभी मौजूद है उसका नाम है "सद्भावना पुलिस चौकी" समीर शेख़ बताते है की अब हम लोग इस बात के आदि हो चुके है अब ऑटो वाले भी मौहल्लो को इसी नाम से जानते है और अब यह मौहल्ले अहमदाबाद की पहचान बन चुके है

गुजरात मॉडल की जय हो इंसान बाटा, मौहल्ले बाटे बाट दिये इन्सान




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