अयातुल्ला अल-निम्र का सऊदी निष्पादन एक चतुर चाल थी
सऊदी सरकार ने अपनी जेलों में लम्बे समय से बन्द ४७ क़ैदियों को मौत की सज़ा का निष्पादन कर अचम्भित कर दिया, इन क़ैदियों पर सरकार के खिलाफ आतंकवाद और सामान्य विद्रोही का इल्ज़ाम था।
विश्लेषक के दृष्टिकोण से यह सऊदी अरब का एक चतुर राजनीतिक कदम था। सऊदी - यमन में की गयी सैन्य कारवाही से बिल्कुल फस गये है और इससे बाहर आने का कोई रास्ता उनके सामने नहीं दिख पड़ रहा है गठबंधन के साथी भी सऊदी अरब का साथ छोड़ रहे है या युद्ध को समाप्त करने हेतु दबाव बना रहे है। ज्ञात हो पिछले नौ-महीनो की भीषण बमबारी के बाद भी सऊदी, यमन में कठपुतली सरकार को स्थापित कर सकने में सफल नहीं हुई और दूसरी तरफ यमन सेनाओ ने एक के बाद एक सऊदी शहरों को अपना निशाना बना रहे है। इराक और सीरिया में सलाफी जिहादियों के माध्यम से सऊदी सत्ता परिवर्तन परियोजनाओं को भी झटका लगा है और उनपर होने वाले खर्चे से परेशान सऊदी हुकूमत को दूसरा झटका दुनिया में गिरते कच्चे तेल की कीमतों के कारण गिरती अर्थव्यवस्था को सभालने में लाचार नज़र आ रही है और ऐसे में सऊदी सरकार ने अपने लोगों पर नये करों की पेशकश की यह सच है नये कर शायद ही कभी लोकप्रिय नहीं होते।
अपने नागरिको का ध्यान इन मूल समस्या से हटाने और मुद्दे से भटकने हेतु सऊदी सरकार ने अपनी जेलों में बन्द तथाकथित अलगाववादी और देशद्रोही लोगो के समुह का क़त्ल कर देश की राजनीती को नया मोड़ देने को प्रयास किया है जो देश के किये घातक भी हो सकता है और सऊदी अरब को इससे होने वाले दुषपरिणाम के लिये तैयार रहना होगा। ज्ञात हो मारे जाने वाले ४७ लोगो में अयातुल्ला निम्र भी शामिल थे जो शिया समुदाय से सम्बन्ध रखते थे और क़तीफ़ प्रोविंस में उनके चाहनेवाले बड़ी संख्या में मौजुद है सऊदी सरकार ने २०१२ में गिफ्तार कर जेल में दाल दिया था उनपे इल्ज़ाम था की उन्होंने बहरैन और सऊदी अरब में शिया समुदाय के बराबरी के दर्जे के लिये लोगो को उकसाया। वह तानाशाही के खिलाफ थे और उनकी मौत से पुरे अरब वर्ल्ड में तीखी प्रतिकिर्या देखने को मिल रही है और वह दिन दूर नहीं जब निम्र की मौत सऊदी हुकूमत के खात्मे का आधार बनेगी।
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