शनिवार, 22 अक्टूबर 2016

मित्रो, आप में से कितने लोगो को पता है कि इसी दुनि ने एक विचारधारा को भी स्थान दिया जिसका दावा था कि यदि वह सत्ता में आयी तो वह उनकी समस्त परेशानियों से मुक्त कर एक सुन्दर जीवन प्रदान करेगी उस विचारधारा को नाज़िस्म कहते है जिसका जन्म १९३० में जर्मनी में हुआ
इस विचारधारा को समझने के लिए हमे जर्मनी में चल रही उस समय की राजनीतिक गतिविधियों की पृष्ठभूमि को जानना अवश्य होगा जो मै बिना विस्तार में जाये थोड़े में समझने का प्रयास करुगा१९१८ में हुई जर्मनी क्रांति के उपरान्त जर्मनी में एक नई राजनीतिक व्यवस्था ने जन्म लिया जिसका कार्यकाल मात्र कुछ साल था उसे नाम दिया गया वेईमार रिपब्लिक जिसका एक संविधान था जिसमे रिपब्लिकन, दक्षिणपंथी, वामपंथी के विचारो को जगह दी गयी परन्तु उस समय के राजनीतिक कारणों के कारण संविधान के कार्यान्वयन में काफी समस्या का सामना करना पड़ा जर्मनी प्रथम विश्वयुद्ध में अपमानजनक हार से उभरने की कोशिश कर रहा था वर्साय की संधि की शर्तो को अमल में लाना एक बड़ी चुनौती थी जर्मनी एक बहुत बुरे दौर से गुज़र रहा था जर्मनी की आन्तरिक स्थिति ख़राब थी बेरोज़गारी, मुद्रास्फीति, अपने चरम पर थी सत्ताधारी पार्टी विभिन्न आरोप से घिरी थी उसी समय एक और विचारधारा अपने पैर पसार रही थी जो इन सारी मुश्किलो के समाधान का दावा पेश कर रही थी और सत्ताधारी पार्टी के प्रति आक्रामक रुख बनाये हुए थी उसका नाम था नाज़ी पार्टी
आज इतना ही बाकी कल

हिटलर जिन्दा है -

भारत में भी कई प्रकार के विचारो को स्थान दिया और उनके प्रचार प्रसार की पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान की जहाँ एक तरफ १९१५ के बाद कांग्रेस ने भारत के स्वन्त्रता संग्राम में बढ़-चढ़ के हिस्सा लिया वही वाम विचारधारा भी रूस की क्रांति से प्रभावित हो भारत को आज़ाद करने ले लिये अपने विचारो से युवको को आकर्षित करने में सफल रही और क़ुर्बानी में अपना स्थान भारत के इतिहास में सूचिबद्ध किया मुस्लमान जो १९४७ तक भारतीय राजनीती की मुख्यधारा का हिस्सा थी उसने अपनी भागीदारी का परचम लहराया, क्रन्तिकारी कविता से युवा और आम जन में जान फुकी, लेखको ने समाजिक बुराइयों को अपनी लेखनी से उजागर किया बहुत कम लोग जानते होंगे आज दलित कहे जाने वाले समाज का भारतीय समाजिक दोषो और कुरीतियो को समाप्त करने हितु जो योगदान किया वह आज इतिहास के पन्नो में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है और अपनी गौरवशाली इतिहास का परिचय देता है १९४७ के बाद मुस्लमान और दलितों को हाशिये पर धकेलने का योजनाबद्ध तरीके से प्रयास हुआ और उसमे सफलता भी मिली मगर कहते है जिन्दा कौम कभी नही मरती और शायद यही कारण है यह कौमे हाशिये पर धकेले जाने के बाद भी अपने जिन्दा रहने का सबूत पेश कर रही है

इन सब के साथ एक और विचारधारा जन्म ले चुकी थी और पल रही थी वह थी "राष्ट्रवादी" विचारधारा जो पूरी तरह ऊपर उल्लेखित विचारधाराओ से भिन्न थी राष्ट्रवादी विचारधारा पूरी तरह नाज़ी विचारधारा से प्रभावित थी इसको समझने के लिये यह समझना आवश्यक होगा की क्या है राष्ट्रवाद: राष्ट्रवाद एक विश्वास, पन्थ या राजनीतिक विचारधारा है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने गृह राष्ट्र के साथ अपनी पहचान बनाता या लगाव व्यक्त करता है यह एक ऐसी अवधारणा है जिसमें राष्ट्र को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाती है यह विचाधारा में कई संशोधन हुए और अन्तः राष्ट्रवाद को हिंदूराष्ट्रवाद से भी पहचान दिलाने के अथक प्रयास हुए - कुछ कामयाबी भी प्राप्त हुई यह भी विचार चर्चा का बिंदु बना कि जन्म के आधार पर खुद को हिन्दू कहने वाले या कहलाने वाले लोग ही भारतीय राष्ट्र के प्रथम नागरिक हो सकते हैं

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हिटलर जिन्दा है -


यह बात सन १९२९-१९३३ के दरम्यान की है जब जर्मनी अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा था वह प्रथम विश्वयुद्ध हार चुका था, उसे वर्सेल्स ट्रीटी (Versailles Treaty) को मानने पर मजबूर किया गया जिसमे जर्मनी को प्रथम विश्वयुद्ध का दोषी माना गया और उसके एवज़ में जर्मनी को काफी बड़ी रक़म के आलावा अपनी उपनिवेश बस्ती को छोड़ना पड़ा जर्मनी की आंतरिक स्थिति बहुत ख़राब थी वह बेरोज़गारी और मुद्रास्फीति को अपने काबू में कर सक्ने के भरसक प्रयासो में विफल होता दिखाई दे रहा था ऐसे में जर्मनी के नागरिको को नाज़ी पार्टी से कुछ बेहतर नतीजो की उम्मीद लगने लगी थी

यहाँ यह बताना ज़रूरी हो जाता है की १९३० के शुरू में नाज़ी पार्टी एक लोकप्रिय पार्टी नही थी परन्तु १९३२ के अन्त तक जर्मनी के नागरिक इस बात के प्रति आशावान थे की यदि कोई जर्मनी को उसकी बदहाली से बचा सकता है तो वह केवल नाज़ी पार्टी ही है उसके कारण भी थे उसका नेता एक ऊर्जावान नेता था वह शाकाहारी था शराब नही पीता था चरित्रवान था उसपर भष्टाचार के आरोप नहीं थे वह बेहतरीन वक्ता था उसकी रैलियों में लाखो लोग शामिल होते उसके भाषणों में जोश होता वह यह कहता की वह सबको नौकरी देगा,  मुद्रास्फीति पर लगाम लगायेगा, जर्मनी को उसका पुराना सम्मान वापस दिलवाये गा और अच्छे दिन वापस लाने का दावा करता था रैली में जमा लोग उसके सुर में सुर मिला के "अच्छे दिन आने वाले है" को दोहराते थे जर्मनी आशावान था और बड़ी संख्या में युवक, फौजी, किसान, मज़दूर   तथा जर्मनी का मध्य वर्गीय समाज उसका समर्थन कर रहा था उस नेता का नाम अडोल्फ हिटलर था

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हिटलर जिन्दा है -

१९३२ के अंत तक जर्मनी किसी भी प्रकार के विकल्प के लिए पूर्ण रूप से तैयार था और हिटलर अपने लुभावने सपने दिखाने में व्यस्त था। सब को काम सब को बेहतर ज़िन्दगी युवाओ को सुनहरा भविष्य ने उसकी लोकप्रियता को काफी बड़ा दिया था। जर्मनी की मीडिया और बड़े औद्योगिक घरानों का समर्थन प्राप्त था। ३० जनवरी १९३३ चांसलर का पद हासिल करने में सफल रहा जो मंत्रालयों के कैबिनेट का सबसे उच्च पद था। वोक्सवैगन जर्मनी की कार बनाने वाली कम्पनी उसने हिटलर को चांसलर जैसे उच्च पद को हासिल करने में अत्यधिक सहायता प्रदान की।

यहाँ यह बताना आवश्यक होगा की हिटलर की पृष्टभूमि क्या थी ? हिटलर का जन्म ऑस्ट्रिया में सन १८८९ में मध्य-वर्गीय परिवार में हुआ था। युवा होते ही वह जर्मनी की सेना का हिस्सा बना उसने प्रथम विश्वयुद्ध में हिस्सा लिया तथा कई शोर्य पदक हासिल किये। वह प्रथम विश्वयुद्ध में जर्मनी की शर्मनाक हार से आहत था और ट्रीटी ऑफ़ वर्सेल्स ने उसे और उग्र बना दिया था। सेना छोड़ने के बाद उसने जर्मन वर्क्स पार्टी में अपनी जगह बनाई बाद में जिसका नाम बदल के नेशनल सोशलिस्ट जर्मनी वर्कर पार्टी हुआ जो अन्तः नाज़ी पार्टी के नाम से पहचान बनाई। हिटलर का बचपन संघर्षपूर्ण रहा परन्तु उसने कभी चाय या अखबार नही बेचा जैसा कुछ लोगो का कहना है। वह बहुत अच्छा वक्ता था वह जन आंदोलन का अच्छा संचालक के साथ साथ वह लोगो को यह विश्वास दिलाने में सफल रहा की अच्छे दिन आयेगे जो शायद कभी नहीं आये। वह कहता था कि वह एक मज़बूत राष्ट्र का निर्माण करेगा और सबको नौकरी देगा।
आज इतना ही बाकी कल।

हिटलर जिन्दा है -

मौजूद दस्तावेज़ों के अनुसार जनवरी ३०,१९३३ में प्रेजिडेंट हिंडेनबर्ग के द्वारा हिटलर को चांसलर की ज़िम्मेदारी सौपे जाने के तुरन्त बाद हिटलर अपने सुनियोजित मनसूबो के तहत अपने काम को अंजाम देने में लग गया २८ फ़रवरी १९३३ में हिटलर ने अपने पहले हुकुमनामे को जारी कर समस्त मानव आधिकारो पर प्रतिबन्ध लगा दिया, अब बोलने की आज़ादी, लिखने की आज़ादी सभा करने की आज़ादी गैर-कानूनी घोषित करार किया गया बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुई जिसमे अधिकांश कम्युनिस्ट और डेमोकैट्स और कैथोलिक ईसाई थे उन्हें कॉनसन्ट्रेशन कैंप में रखा गया, विरोध करने वालो को गोली मार दी गयी पुरा जर्मनी नये घटना कर्म को देख रहा था विरोध के स्वरों को कुचल दिया गया

जर्मनी के निवासी पिछले कुछ दशक से अपनी बदहाली से परेशान होने के कारण हिटलर के इस कृत्य को भी देश की और अपनी बेहतरी के रूप में देख रहे थे मार्च १९३३ में बहुचर्चित इनेबलिंग एक्ट को मन्ज़ूरी दे दी गयी यहाँ इनेबलिंग एक्ट की विषय में थोड़ा विस्तार में बताना आवश्यक होगा इस कानून के अनुसार हिटलर को किसी कानून को पारित और संशोधन के लिये जर्मनी के संसद से मन्ज़ूरी की आवश्यकता नही थी जिसको अन्तः राष्ट्रपति पॉल वॉन हिंडनबर्ग ने हस्ताक्षर किये इस प्रकार हिटलर ने सारी औपचारिकताओं को पुरा कर वह जर्मनी का तानाशाह बन चुका था

उसका समस्त सरकारी प्रतिष्ठापन पर क़ब्ज़ा कर उनमे कार्यरत लोगो को कन्सेन्ट्रेशन कैंप में भेज दिया और उनकी जगह फौजी हुकुमरानों ने ले ली मीडिया और न्यायतंत्र पर पूर्ण रूप से हिटलर के अधीन थे और उसका समर्थन कर रहे थे अब हिटलर की सबसे बड़ी प्राथमिकता उस समाज का निर्माण था जो नाज़ी परिकल्पना के अनुरूप हो

हिटलर मन की बात करता लोगो को नाज़ी समाज की विशेषताओ से अवगत करवाता और लोगो में उत्साह भरता उसका व्यापक असर यह हुआ की लोग दुनिया और देश को नाज़ी की नज़र से देखने लगे अपने यहुदी पडोसी के घरो को चिन्हित करते ताकि उन्हें मारा या कॉनसन्ट्रेशन कैंप के हवाले किया जा सके लाखो की संख्या में नाज़ी में शामिल होने के आवेदन आने लगे मगर यह कहना भी अनुचित होगा कि पुरा जर्मनी हिटलर के साथ था एक बहुत बड़ा धड़ा दबे स्वर में उसकी कार्यशैली पर सवाल उठा रहा था

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हिटलर जिन्दा है -

हिटलर सत्ता हतिया चुका था और उसने अपने तुरन्त दिये हुकुमनामे से अपनी सत्ता के स्वरुप और कार्यशैली के विषय में देश को अवगत करा दिया थाअब समस्त सरकारी प्रतिस्थानों में सेना के अधिकारियो ने काम-काज अपने हाथो में ले लिया था अधिकांश सरकारी मुलाज़िम जेल में भेजे जा चुके थेवह मीडिया को अपने अधिकार में ले चुका था - मीडिया उसकी प्रसंशा में शोर्य गाथा का बखान कर रही थी हिटलर कम अंतराल पर "मन की बात" से फ़ौज और जर्मनी के नागरिको तक अपनी बात पंहुचा रहा थाअब वह समय गया था जब सामाजिक संरचना नाज़ी अवधारण के अनुसार की जाये

प्रेजिडेंट हिंडेनबर्ग की मौत के बाद हिटलर ने राष्ट्रपति कार्यालय को चांसलर कार्यालय में विलय कर दिया अब वह पूरी तरह से जर्मनी का तानाशाह बन चुका थाउसका प्रचार प्रसार(propaganda) तंत्र बहुत मज़बुत और असरदार थाहिटलर और उसके प्रचार-प्रसार तंत्र ने इस बात का पुर्ण रूप से अपनी बात लोगो तक पहुचने में निपुण था वह ईसाई बाहुल्य समाज को विश्वास दिलाने में सफल रहा की ईसा की हत्या यहूदियो के द्वारा की गयी थी अर्थात उन्हें जीने का अधिकार नहीं है फिर क्या था लोगो ने यहूदियो को चिन्हित कर फौजी अधिकारियो को बताना शुरू कर दिया और इस प्रकार शुरू होता है यहूदियो का नरसंघारनाजियों 'प्रचार हमले के एक प्रमुख साधन साप्ताहिक नाजी अखबार डेर Stürmer (हमलावर) थाहर मुद्दे के पहले पन्ने के नीचे, बोल्ड अक्षरों में, यह घोषणा की जाती, "यहूदियों हमारा दुर्भाग्य रहे हैं" डेर Stürmer भी नियमित रूप से यहूदियों के कार्टून जिसमें वे के रूप में झुका नाक और बनमानुष नुमा झुकी कमर से चित्रित किया जाता१९३८ में पत्रिका की डेढ़ लाख प्रतियों वितरित कि गयी: अखबार के प्रभाव दूरगामी थाइसी दौरान मौजुदा दस्तावेजो के अनुसार लगभग ६० लाख यहूदियो की हत्या की जा चुकी थी जो दुनिया में यहूदियो की कुल आबादी का दो तिहाई थीरिकार्ड्स के अनुसार १९३९ तक लगभग १६% यहूदी नौकरी या छोटे कारोबार से अपनी जीविका चला रहे थे बाकि या तो कंसेंटेशन कैंप में थे या उनकी हत्या कर दी गयी थी

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हिटलर जिन्दा है -


नमस्कार मित्रो, अपनी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए आज हमारा प्रयास होगा कि नाज़ी समाज की संरचना क्या थी तथा उसमे महिलाओ की भूमिका क्या रहीयह बात ध्यान देने योग है कि १९३३-१९४५ के समय में जब हिटलर सत्ता में था उस समय समाज के विभिन्न अंगों की भूमिका का निर्धारण सत्ता के द्वारा तय किया जाता था तथा आदेशो की अवहेलना करने वाले व्यक्ति को कठोर यातना का फल भोगना होता थाआज ७० सालो के बाद हिटलर घृणा का नाम है परन्तु विभिन्न देशो में उसके प्रशंसक जीवित है और उसके द्वारा दी गयी नाज़ी विचारधारा की सरहाना करते है या सत्ता में आने के पश्यचात उसको किसी किसी रूप में अमल में लाने के प्रति वचनबद्धता दर्शाते है जबकि उन्हें यह ज्ञान है की एक ऐसी विचारधारा जिसको पुरे विश्व ने नकार दिया हो उसे दोबारा जीवित करना आसान होगा

नाज़ी समाज में महिलाओ की भूमिका बहुत विशेष थी और नाज़ी समाज की अवधारणा को पूर्णरूप से किर्यान्वित करने की दिशा में एक मज़बुत पहल के रूप में देखा जाता हैहिटलर इस विषय में बहुत ही स्पष्ट था उसका यह कहना था की महिला की भूमिका घर के भीतर है नाकि घर के बाहरमहिला के मुख्य ज़िम्मेवारी घर का रखरखाव और एक सुन्दर घर की स्थापना ताकि पति घर में आराम की अनुभूति कर सके तथा स्वस्थ बच्चे को जन्म देना जो नाज़ी योग्यता के अनुकूल हो तथा उनके संस्कारो में नाज़ी संस्कार होमहिलाओ को इसके लिये प्रशिक्षण भी दिया जाता

शुरुआती दिनों में लड़कियों/महिलाओ को स्कूल में यह ज्ञान दिया जाता की उन्हें कम उम्र में स्वस्थ एवम प्रबल युवक को चिन्हित कर उससे शादी कर घर बसा लेना चाहियेअच्छा और आरामदेह घर की अवधारणा के प्रति ज्ञान दिया जाता ताकि कामगर पति को किसी प्रकार की असुविधा हो१९३३ में हिटलर सत्ता में आते ही उसके शुरुआती दिनों में एक नया कानून पारित किया गया जो महिलाओ को जल्दी शादी करने तथा कम से कम बच्चे पैदा करने के लिये प्रोत्साहित करता था कानून "Law for the Encouragement of Marriage" के नाम से जाना जाता हैइस कानून के प्रावधानों के अनुसार जल्दी शादी करने वाले जोड़ो को सरकारी कोष से १००० मार्क(जर्मन मुद्रा) दिये जाने का प्रावधान था जो की उस समय के माह के वेतन के समतुल्य होता थाइस योजना का लाभ उठाते हुए ८००००० महिलाओ ने अपनी पसन्द के स्वस्थ एवम प्रबल युवको से विवाह कियाइस योजना का उत्साहवर्धक परिणाम सामने आयेयुवा उत्साहित थे, इस कर्ज़े की आदायगी भी बेहद दिलचस्प थीयदि महिला पहले स्वस्थ और आर्यन विनिर्देश के अनुसार बच्चे को जन्म देती है तो बतौर कर्ज़ १००० मार्क में से २५% क़र्ज़ माफ़ कर दिया जाताइसी प्रकार स्वस्थ बच्चे पैदा करने के पुरा क़र्ज़ माफ़ कर दिया जाताइस योजना का मुख्य उद्देश्य स्वस्थ युवा की आबादी में बढ़ावा जो आगे चल नाज़ी फ़ौज का हिस्सा बन सके


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जैसा हम पहले चर्चा किया की नाज़ी समाज की क्या स्तिथि थी और किस प्रकार एक कानून के तहत महिलाओ को जल्दी शादी और कम से कम बच्चे पैदा करने के किये अधिकृत किया गया था बाद में इस कानून को निरस्त कर दिया गया

इस कानून का मुख्य उद्देश्य नाज़ी आबादी को बढ़ाना था जो नाज़ी संस्कारो से युक्त नाज़ी सेना का प्रमुख अंग बन सके इस के पीछे नाज़ी लीडरशिप की अवधारणा यह भी थी की जर्मनी की उन्नति के साथ एक बड़े कामगारों की सेना की आवश्यकता को पुरा करने के किये हिटलर को नाज़ी संस्कार युक्त बड़े पैमाने पर युवको की आवश्यकता होगी जर्मनी की संभावित बड़ी हुई आबादी को ध्यान में रखते हुए यूरोप ने अपने देश में गर्भ निरोधक दवा एवं गर्भपात के कानूनों में संशोधन किया इस बात का प्रावधान था यदि एक पति अपने परिवार में बच्चे पैदा करने के पश्चात् और बच्चे पैदा करने की इच्छा रखता है तो आपसी सहमति से किसी दूसरी औरत से और बच्चे पैदा करने के लिये स्वतंत्र था परन्तु इस प्रावधान को कानून की शक्ल नही दी जा सकी, नाज़ी नेतृत्व का यह सोचना था की अतरिक्त बच्चे पैदा करने वाले प्रावधान को कानून का रूप देने से समाज में अराजकता फैल सकती है

नाज़ी समाज में औरतो को घर के बाहर काम करने की आज़ादी नहीं थी जबकि वेइमार जर्मनी में १००००० शिक्षिका, ३००० महिला चिकित्सक, १३००० महिला संगीतकार काम करते थे १९३३ में हिटलर के सत्ता में आने के बाद इन सारी महिलाओ को नौकरी से निकाल दिया गया १९३७ में कौशल की कमी को ध्यान में रखते हुए महिलाओ को कारखाने में काम करने की अनुमति प्रदान की गयी इसी साल महिलाओ को मिलने वाला १००० मार्क का बच्चे पैदा करने को बढ़ावा देने वाले कानून को निरस्त कर दिया गया

महिलाओ की वेश-भूषा के विषय में भी हिटलर के द्वारा दिशा निर्देश जारी किये गये थे और उनका अनुपालन करने पर कठोर दण्ड के प्रावधान थे महिलाओ को परंपरागत परिधान धारण करने की सलाह दी गयी थी जीन्स या अन्य किसी प्रकार की पोशाक पर प्रतिबन्ध था वह फैशन नहीं कर सकती थी, बालो को रंगना मना था,फ्लैट जूते प्रतिबंधित थे और अपने शरीर को सुन्दर और दुबला रखने हेतु किसी भी प्रकार की औषधि का प्रयोग वर्जित था नाज़ी हुक़ूमत का यह मान्यता थी ऐसा करने से महिलाओ में प्रजनन में कठिनाई सकती है प्रत्येक वर्ष १२ अगस्त को हिटलर की माँ के जन्मदिन धुमधाम से मनाया जाता था तथा उसी दिन सबसे अधिक स्वस्थ बच्चे पैदा करने वाली महिलाओ को समानित किया जाता था जो महिला या उससे अधिक स्वस्थ बच्चे पैदा करती उसे गोल्ड क्रॉस से और बच्चे पैदा करने वाले को सिल्वर और क्रमशा ब्रोंज क्रॉस से नवाज़ जाता

अब यह समझ में आया की अपने देश में महिलाओ को - बच्चे पैदा करने के लिये बिना बच्चे वाले क्यों प्रोत्साहित करते है तथा महिलाओ को घर में रहने की नसीहत किस आधार पर दी जाती है, जीन्स पहनने से बलात्कार की घटना में इज़ाफ़ा होने का तर्क कहाँ से आया महिलाओ के प्रति संकीर्ण मानसिकता के पीछे का सत्य क्या है



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