कहानी दाढ़ी की
यह बात १९८३-८४ की होगी मैने दाढ़ी रखी बड़ी दाढ़ी और ऊपर से फुल मास्क हेलमेट सवारी भी येज़दी थी दिन कट रहे थे इस बीच सिख आतंकवाद की घटनाओ में एक दम से बढ़ोतरी हुई और कुछ आतंकवादियों ने चितरंजन पार्क में हो रहे दुर्गा पूजा के उत्सव में गोली बारी की और कई लोग हताहत भी हुए। उस ज़माने में पुलिस की नाकाबंदी बहुत अधिक होती थी ऐसी अब देखने को नहीं मिलती और (ईश्वर से प्रार्थना है आने वाले दिनों में हमारी आने वाली पीढ़ी को भी न देखने को मिले) मै फरीदाबाद में रहता था और ऑफिस आसिफ़ अली रोड पर होता था रोज़ का आना जाना था और रास्ते में करीब २० नाके मिलते थे और दिल्ली-हरियाणा का बॉर्डर अलग था। हेलमेट के बाहर से दाढ़ी देख पुलिस स्टेन गन मेरे सीने के करीब रख कर मेरी और मोटर साइकिल की सघन तलाशी लेती थी।
जैसे जैसे पंजाब में या दिल्ली के आस-पास कोई आतंकी घटना घटित होती थी पुलिस की बौखलाहट दिल्ली की सड़को पर साफ़ नज़र आती थी और मेरी बड़ी हुई दाढ़ी भी। एक दिन मै ऑफिस से घर आ रहा था शाम के कोई ८ बजे होंगे आश्रम के आगे पुलिस का बैरिकेड लगा था दारोग़ा जी हाथ में खुली रिवॉल्वर लिए बीच सड़क पे खड़े थे और मेरा वहा पहुचना दारोग़ा जी का इशारा कर के रोकना मेरे लिए आम चूका था मगर उस दिन मुझे आज भी याद है दारोग़ा जी ने रिवॉल्वर मेरे सीने पर रख हेलमेट उतरवाई और मेरी मोटर साइकिल की ऐसी तलाशी जो पहले अभी नहीं हुई थी पेट्रोल की टंकी तक में टॉर्च से देखी गयी मेरी तलाशी मोटर साइकिल के कागज़ यानि २० मीनट के बाद आगे जाने की इजाज़त और घर तक ६-७ जगह यही हुआ। मै डर गया था और सोचा दाढ़ी नामक मुसीबत से पीछा छुड़ाने में ही बेहतरी है।
यह सोच कर मै दूसरे दिन नाई की दूकान पर गया जहाँ से मै बाल कटवाया करता था और मेरा परिचित था मै दूकान में जाते ही कुर्सी पर विराजमान हो कर बोला नईम भाई दाढ़ी काट दो क्लीन शेव कर दो उसने मना कर दिया और बोला भाई बुरा न माने कही और कटवा ले हमने पूछा क्यों भाई आप हमे नहीं जानते है उसका जवाब था जानता हूँ मगर दाढ़ी नहीं काट सकता पता नहीं किसी मुसीबत में न पड़ जाऊ। मै परेशान था अपनी इस हिमाकत पर की दाढ़ी रखी ही क्यू। फरीदाबाद में मेरा दोस्त रहा करता था प्राण मेरे हर मर्ज़ का इलाज उसके पास होता था। आखिर में मुझे उसकी याद आयी और मै सीधे उसके घर पहुंच गया ३ बजे के आस-पास उसको दाढ़ी की कहानी सुनाई और मदद मांगी भाई प्राण तुम ही इसे काट डालो उसने तस्सली दिलाई खाना खिलाया और एक नाई के पास ले गया और उसे कहानी किस्सा सुना कर इस बात पर तैयार किया की वह मेरी मदद करे। भाई साहेब मुझे मुसीबत से नजात मिली और मै क्लियर शेव हो गया उस वक़्त उसने शेव करने के १०० रूपया लिया था मगर १०० रूपया में मुसीबत चली गयी मै राहत महसूस कर रहा था।
उसके बाद मैंने वह हिमाकत अभी नहीं किया।
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