लव - जिहाद क्या है।
लव जिहाद को लेकर देश का सियासी बहस और उससे सम्बधित सरगर्मी उफान पर है। उत्तर प्रदेश भाजपा की मथुरा के बृंदावन में दो दिवसीय बैठक में लव-जिहाद पर प्रस्ताव पारित करने की घोषणा और फिर उसपर यू-टर्न ने विपक्षी पार्टियों और मीडिया को बहस का एक विषय थमा दिया है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि लव-जिहाद शब्द को तूल देकर केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में सियासी फायदा उठाना की नीयत उछाल रही है। चूंकि इसका सीधा नुकसान समाजवादी पार्टी को होगा इसलिए मुलायम और अखिलेश परेशान हैं।
लव-जिहाद है क्या?
जवान मुसलिम लड़कों द्वारा अन्य धर्म की लड़कियों को प्यार के जाल में फंसाकर उनका धर्म-परिवर्तन करना लव जिहाद या रोमियो जिहाद कहा गया है। बीजेपी में कितने लव-जिहादी मौजूद है क्या सत्तारूढ़ बीजेपी इसका आकड़ा सार्वजानिक करने को तैयार है, मुख्तार अब्बास नक़वी लव-जिहादी जिसने राजपूत जाति की हिन्दू लड़की से ब्याह रचाया और अपने समाज से तिरस्कारित नक़वी ने बीजेपी की शरण ली अपने बच्चो के नाम मुसलमानो के नाम पर रखे लड़के का ख़तना करवाया और बड़े होने पर शादी मुस्लिम परिवार में की। इस लव-जिहादी को बीजेपी ने उच्च पद पर आसीन किया क्यों। बीजेपी को इसका जवाब देश को देना चाहिये। शहनाज़ा दूसरा जिहादी पत्नी का नाम रेनू भगा के शादी की इस जिहादी को सम्मान क्यों दिया गया इसका कारण साफ है सार्वजानिक रूप से मुसलमानो को गाली देने वाले मुसलमानो का बीजेपी में स्वागत है। सिकंदर बख्त बीजेपी का पहला लव-जिहादी जिसने अपनी पूरा जीवन बीजेपी को दे दिया उसकी भी कहानी औरो से जुदा नहीं थी।
लव-जिहाद एक वास्तविकता है, लेकिन साथ ही लव और जिहाद दोनों विरोधाभासी भी हैं। लव कभी जिहाद नहीं हो सकता और जिहाद कभी लव नहीं हो सकता है। दरअसल लव-जिहाद कोई ऐसा शब्द नहीं जिसको सियासी जामा पहनाया जाए। यह बेहद गंभीर शब्द है और इसको कायदे से समझने की जरूरत है। जिसने इसका गूढ़ अर्थ समझ लिया उसके लिए यह अमृत और जिसने नहीं समझा उसके लिए जहर। लव-जिहाद में दो शब्द हैं। लव का मतलब होता है प्यार और जिहाद का मतलब होता है संघर्ष, जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद करना। भाजपा को इन शब्दों के अर्थ में शायद कोई रूचि नहीं है और सियासी ध्रुवीकरण में लगी है। निश्चित रूप से इसका स्याह पक्ष भी है, लेकिन उसको गंभीरता से समझकर उसका शांतिपूर्ण समाधान करने की जरूरत है।
विश्व हिन्दू परिषद के नेता पिछले साल सितम्बर में हुए मुजफ्फरनगर दंगों के पीछे लव-जिहाद का हाथ होने की रट लगा रहे हैं। महाराष्ट्र में भी संघ से जुड़े संगठनों ने लव-जिहाद का मुकाबला करना शुरू किया है। यहां इसी साल विधानसभी के चुनाव होने हैं। भाजपा और हिन्दूवादी संगठनों की राय में लव-जिहाद का मतलब मुस्लिम लड़के हिन्दू लड़कियों को बहला-फुसलाकर पहले शादी करते हैं, फिर धर्म परिवर्तन कराकर लड़की को आतंकवादियों के हवाले कर देते हैं या फिर किसी और को बेच देते हैं। इस तरह की घटनाएं देश के कई राज्यों में घटित हो रही हैं, लेकिन इसको लव-जिहाद की संज्ञा नहीं दी जा सकती है। इस तरह की घटना तो हिन्दू लड़के और लड़की की शादी से भी तो पनप सकती हैं और घटनाएं हो भी रही हैं। जरूरत इस बात की है कि किसी भी संगठन को या फिर राज्य सरकारों के संज्ञान में ऐसी घटनाएं आती हैं तो उसे चिह्नित कर उसका सामाजिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया जाना चाहिए और उसका स्थायी हल ढूंढा जाना चाहिए।
यहां बड़ा सवाल यह भी उठता है कि आखिर मुस्लिम लड़कों में ऐसा क्या होता है जो हिन्दू लड़कियां उसके मोहपाश में फंस जाती हैं और शादी करने व धर्म परिवर्तन तक का फैसला कर लेती हैं। कुछ समाज विज्ञानियों का मानना है कि हिन्दू लड़कियां जानती हैं कि दुनिया में सिर्फ मुस्लिम कौम ही ऐसी है जो सबसे कम शराब पीती हैं क्योंकि धार्मिक रूप से उनपर सख्त पाबन्दी है, वे जानती हैं कि मुस्लिम कौम ही ऐसी कौम है जो सबसे कम मक्कारी करती है क्योंकि धार्मिक रूप से उन पर सख्त पाबन्दी है, वे यह भी जानती हैं कि मुस्लिम कौम ही ऐसी कौम है जो सच्चाई की खातिर अपनी जान भी कुर्बान कर सकती है। कहने का मतलब यह कि मुस्लिमों में धार्मिक कट्टरता ज्यादा होती है और धर्म के प्रति निष्ठा भी। हिन्दू धर्म उसके मुकाबले उदार है और हिन्दुओं में धर्म के प्रति निष्ठा भी उतनी नहीं होती जितना मुस्लिमों में। इसलिए मेरी दृष्टि में दुनियाभर में फैले हिन्दू संगठनों को हिन्दुओं में धर्म के प्रति कट्टरता का भाव जगाना होगा। यह कहने से काम नहीं चलेगा कि हिन्दुत्व जीवन जीने का एक तरीका है।
एक बात और, दक्षिण पंथियों की लव-जिहाद की बात सैद्धांतिक रूप से अपनी जगह सही हो सकती है, मगर लव-जिहाद के बाद जो कुछ होगा या हो सकता है उसकी कल्पना तो कीजिए। मुस्लिम लड़के का ससुराल हिन्दू होगा और पत्नी की तरफ के सारे रिश्तेदार भी हिन्दू होंगे। थोड़ी देर के लिए लड़की को यदि मुसलमान बना भी दिया जाता है तो जो बच्चे पैदा होंगे क्या वे जिहादी मानसिकता के हो सकते हैं? बच्चे के चाचा, ताऊ, दादा-दादी मुस्लिम हैं और मामा, मामी, मौसी, नाना-नानी, ममेरे-मौसेरे भाई हिन्दू। क्या ऐसा बच्चा किसी भी समुदाय से नफरत कर सकता है? इसके बाद तो खुद लव-जिहाद करने वाला की दिल परिवर्तित हो जाएगा।
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