आज के राजनैतिक परिदृश्य में आम आदमी पार्टी
आम आदमी पार्टी की गिरती लोकप्रियता और बेबाक़ छवि में आयी गिरावट आम आदमी पार्टी के लिए चिंता का विषय है और आत्मंथन के फलस्वरूप पार्टी ने यह निर्णय किया की वह दिल्ली में अपनी छवि में सुधर लाने और गिरती लोकप्रियता को पुनः हासिल करने की दिशा में काम कर अपने जनाधार को वापस लेने के लिए वचनबद्ध है और इसी यह भी तय किया की आगामी विधान सभा के होने वाले चुनाव में वह हिस्सा नहीं लेगी। यह एक
अच्छा फैसला है और इस से अपने संसाधनों का संरक्षण कर पुरे सामर्थ के साथ दिल्ली में होने वाले चुनाव में अपना शक्ति प्रदर्शन करे गी। पिछले लोक सभा चुनाव के नतीजों के मद्देनज़र जिसमे आम आदमी का प्रदर्शन काफी निराशजनक रहा और उकी लोकप्रियता में आयी गिरावट तथा पार्टी के अन्दर अंतर्विरोध की ख़बरें पार्टी के ईमानदार लोगो के साथ ईमानदारी के साथ की छवि को धूमिल किया और जिस प्रकार ४९ दिनों में सत्ता त्याग कर अपने ऊपर लगे भगोड़े के तमगे को हटाने के लिए पार्टी को काफी संगर्ष करना होगा तथा पार्टी को पुनः नये तरीके से संगठनात्मक ढांचे में सुधर करना होगा अन्यथा पार्टी का खिसकता जनाधार वापस लाना एक टेढ़ी खीर से कम नहीं होगा।
हालिया लोक सभा चुनाव से यह सामने आयी
की ऐसे बहुत से लोग आम आदमी पार्टी के साथ जुड़े जिनकी राजनैतिक महत्वकांझा दूसरी दलों में पूरी नहीं हो पायी थी उन्हों ने भी ईमानदारी का चोंगा पहन आम आदमी पार्टी का हिस्सा बन गये और चुनाव के पश्चात अरविन्द केजरीवाल को बुरा भला कह कर अपने को पार्टी से अलग कर लिया। आज चुनाव के बाद पार्टी अला-कमान को अपनी सदस्यों के चरित्र और उनकी राजनैतिक सोच की समीक्झा करनी होगी न की भावुकता का परिचय। यह भी ज़रूरी होगा की पार्टी के शीर्ष नेता किसी भी प्रकार के विवादित बयानबाज़ी से बचे और आम आदमी से जुड़े मुद्दों को उजागर करे न की की दुसरो को बेईमान साबित करने की जद्दोजहद में अपने को मुख्य मुद्दों से विचिलित हो जाये जैसा की पिछले चुनाव में देखने को मिला। ग्रास रुट लेवल पर कार्यकर्ताओ की नियुक्ति और उनको पार्टी के स्थानीय मुद्दों पर प्रशिक्षण ताकि वह पार्टी लाइन पर केन्द्रित रहे। जागरूकता अभियान की पहल मुहल्ला समितियों का गठन नुक्कड़ नाटक जिसमे आम आदमी और स्थानीय आदमी की भागीदार हो कुछ ऐसे गतिविधिया पार्टी के किये सफलता की कुंजी हो सकती है और उसमे लगने वाले संसाधन के लिये अधिक प्रयास की आवश्यकता भी कम होगी और जागरूकता अधिक।
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