कब्रो का फलता-फूलता कारोबार
महंगाई के इस दौर में जहाँ लोगों का जीना दूभर हो गया था वहीँ लोगो ने पैसा कमाने के नये नये हथकंडे भी तलाश कर लिए है उसी शृंखला में एक नया कारोबार हयाती कब्र की शक्ल में खूब फल-फूल रहा है। अब तक ज़िंदा रहने की जद्दोजहद परिवार चलाने की चुनौती के बीच अब मरना भी मुश्किल हो गया है, अब मरने से पहले कब्र के लिये हज़ारो-लाखो रुपया का बन्दोबस्त भी करना होगा वरना मैयत को कब्र नसीब नहीं होगी। यह सुनकर आपको हैरानी जरूर हुई होगी लेकिन यह सच है। इसका एक
कारण जमीन की बढ़ती कीमत भी है महंगाई के दौर में प्रॉपर्टी के साथ-साथ कब्रों के दाम भी बढ़ गये हैं अब तो प्रॉपर्टी की तरह कब्रो का भी सौदा होने लगा है हयाती कब्रो के भी दाम बढ़ा दिए गए है। यहाँ बताना ज़रूरी होगा की हयाती कब्रें क्या होती हैं? ऐसी कब्रें जिन्हें लोग मरने से पहले ही खरीद लेते हैं ताकि मरने के बाद दफन करने के लिए जगह की कमी न पड़ जाये और दफ़्न के लिये मनमुताबिक जगह मिल जाये इसी मंशा से लोग जीते जी अपनी कब्र
के लिए जमीन खरीद लिया करते हैं।
इस बारे में इस्लामी नज़रिये से कब्र के बदले किसी प्रकार का चंदा या कीमत वसूल करना हराम माना गया है इस बारे में ईरान के कुम से सवाल किया गया था कि क्या कब्र के बदले किसी तरह का डोनेशन या फीस कब्रिस्तान के संरक्षक वसूल कर सकते हैं? इसके जवाब में ईरान से फतवा आया था कि कब्र के बदले किसी तरह के मुआवजे की मांग जायज नहीं है, यानी कब्रों के लिए पैसा लेना हराम है।
हयाती कब्र (जिंदा रहते खरीदी गई कब्र के लिए जमीन) ने कब्रिस्तान की जमीन के भाव बढ़ा दिए हैं। सबसे बुरा हाल उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का है जहाँ घटते कब्रिस्तान और ज़िला-अधिकारी के घोषित सर्किल रेट के बढ़ने के कारन भी कब्रो / हयाती कब्रो के भाव में काफी उछाल आ गया है और उत्तर प्रदेश
की राजधानी लखनऊ के तकरीबन सभी कब्रिस्तानों में हयाती कब्रें खरीदना मुश्किल हो गया है।सर्किल रेट बढ़ने के कारण चौक, ऐशबाग, तालकटोरा, गोमतीनगर के कब्रिस्तानों में कब्रो का कारोबार उफ़ान पर है यही वजह है कि वक्फ़ के मुतवल्ली भी कब्रिस्तानाें में कब्र की जगह देने में मनमाना पैसा वसूल रहे हैं। हयाती कब्र ने कब्रिस्तान की जमीन के भाव बढ़ा दिए हैं। शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी बताते हैं कि कब्रिस्तानों में पहले से लोग हयाती कब्रें लेकर भाव बढ़ा रहे हैं। इस पर रोक लगे। साथ ही कब्रिस्तानों में मुतवल्ली के नजराना के नाम पर धन उगाही को रोकना चाहिए।
इस मामले को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारूकी ने कहा है कि कब्रिस्तानों में कब्र की जगह कम होने से ऐसे मामले प्रकाश में आए हैं। इसके बावजूद गरीबों को दफन की सुविधाएं भी दी जाती हैं। उनसे कम से कम नजराना लिया जाता है। वहीँ, शिया वक्फ बोर्ड के प्रशासनिक अधिकारी का कहना है कि कुछ कब्रिस्तानों में जगह कम होने से इस तरह की समस्या आ रही है। महंगाई का असर जरूर पड़ता है, लेकिन डीएम सर्किल रेट के मुताबिक वसूली नहीं हो रही है, परन्तु प्रशासनिक अधिकारी के इस बयान का सत्यापित करने की आवश्यकता है।
शिया के महंगे कब्रिस्तानों में करबला तालकटोरा, इमामबाड़ा गुफरानमॉब कब्रिस्तान के साथ इमामबाड़ा आगा वाकर, मल्का आफाक शामिल है जिसके रेट सबसे ज्यादा हैं। यहां दो गज जमीन के लिए बीस हजार रुपये से एक लाख तक खर्च करने पड़ते हैं। वहीँ, सुन्नी के महंगे कब्रिस्तानों में ऐशबाग, कपूरथला, निशातगंज व गोमतीनगर का कब्रिस्तान सबसे महंगे हैं। इन सभी पर मुतवल्ली द्वारा डीएम सर्किल रेट के मुताबिक कब्र का नजराना वसूला जा रहा है। यहां १० हजार से ८० हजार तक नजराना देना पड़ता है।
कब्रिस्तान में कम हो रही जगह ने प्रापर्टी डीलर जैसा कारोबार करने वालों को एक नया धंधा दे दिया है. शहर में कई ऐसे लोग हैं जो कब्रों को खरीद कर रिसेल कर रहे हैं। इस कारोबार में कब्रिस्तान के मुतवल्ली भी उनका सहयोग कर रहे हैं। लोग कम कीमत की कई कब्रे खरीद कर उनकी कीमत के बढ़ने का इंतज़ार करते है और बाद में बेच कर अच्छी जगह हयाती कब्रे खरीद लेते है और पुरे प्रकरण में मुतवल्ली उनके पार्टनर की भूमिका में होते है जो उनको ग्राहक दिलवाने में सहयोग करते है कब इन्तेहा यह हो गयी है की कुछ कब्रिस्तानों में मुर्दो से ज़्यादा ज़िंदा लोगो की कब्रे है जिन पर जिंदा लोगों की कब्र की तख्ती लगी हुई है यह कब्रिस्तान है तालकटोरा कर्बला के कैंपस में बन रहे नये रौजे के पास यहां पर कब्रों की कीमत सात हजार रुपये से दस हजार रुपये है रेट अभी कम है शायद इसी लिये यहां डिमांड ज्यादा है. यहां की ज्यादातर कब्रें हयाती हैं, यानी जिंदा लोगों की कब्रें।
सबसे महंगी कब्र गुफरामआब में यहां कब्रों की कीमत आसमान छू रही है मन मुताबिक जगह पर अगर अपनी कब्र बनवाने की इच्छा रखनेवालों को एक भारी रकम अदा करनी पड़ेगी यह रकम दस बीस या पचीस-पचास हजार रुपये नहीं बल्कि ७५ हजार रुपये से एक लाख रुपये तक है। इतना ही
नहीं इस कब्रिस्तान में एक और सुविधा आपको दी जा रही है यदि कोई व्यक्ति अपनी कब्र बेचने की इच्छा रखता है तो यह सुविधा उसके पास होगी। यानी रेट
बढऩे पर आप अपनी ही कब्र किसी दूसरे को बेच सकते हैं।
शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने कब्रों के सौदे पर रोक लगाने की नोटिस जारी की है। लेकिन ज्यादातर कब्रिस्तान इसका पालन नहीं कर रहे हैं कब्रों के सौदे पर रोक के बाद भी कब्र के लिए जगह
हासिल करने के लिए मोटी रकम वसूल की जा रही है।
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