घर में एक चुहिया का प्रवेश
दीपावली के दिन पटाखों की आवाज़ से शायद तंग आ कर एक चुहिये ने छुपने की नियत से मेरे घर में शरण ली। बदकिस्मती से उसकी आमद की खबर मेरी पत्नी को हो गयी फिर क्या था एक कोहराम और उससे मरने या भागने की सारी कवायत की गयी परन्तु चुहिया हमसे चालक निकली और वह लापता हो गयी कई दिन उसके दर्शन नहीं हुए। एक दिन
बड़े धूमधाम से नज़र आयी उसकी घेराबंदी की गयी एक तरफ बेटी झाड़ू के कर तैयार दूसरे किनारे जाफ़र साहेब सीख़ की झाड़ू ले कर तैयार और पत्नी ने उसे उसके गुप्त स्थान से निकलने के लिए छड़ी से खटखटाना शुरू किया सारे लोग अटेंशन की पोजीशन में आज तो मारी गयी चुहिया मगर वह अपने स्थान से निकली और अपने दूसरे गुप्त स्थान में शरण ले ली सारे योद्धा अपनी विफलता पर एक दूसरे के ऊपर दोष मढ़ते रहे जैसा अमूम्न होता है।
अब तक चूहिया में घर में रहते कई हफ़्ते हो चुका है और वह घर के हर कोने से अच्छी तरह से वाक़िफ वह रोज़ सवेरे दर्शन देती और घर का प्रत्येक सदस्य चौकना उसकी तलाश में जुट जाता। वह दर्शन दे कर ग़ायब हो जाती सारी की सारी तैयारी धराशाई। घर में एक अफरा-तफरी का माहौल और यह देख कर मन प्रसन्न होता की एक छोटे से जीव में घर के प्रत्येक मेंबर में जान सी फूक दी है।
मेरी पत्नी और चुहिया के बीच यह लुका-छुपी का खेल अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया। परसों मेरी पत्नी चूहा मारने के दवा लाई केक को घर के कई कोने में रखा गया और दुआ मांगी गयी या अल्लाह इस मुसीबत से नजात दिलाये मगर चुहिया भी कम शातिर नहीं थी वह केक खाती रही और तंदरुस्ती बनती रही। दिन में २-३ बार दर्शन दे कर यह भी बताती रही की मै ज़िंदा हूँ और मज़े में हूँ। अब तक उसे इस बात का भी ज्ञान हो चला था की घर में क्या क्या खाने का सामान है और कहा कहाँ रखा जाता है कभी वह भुने चने खाती तो कभी दाले और रात को बिस्कुट पर हाथ साफ़ कर जाती और कुछ न मिले तो उसे मारने को रखे केक का सेवन करती। उसकी ज़िन्दगी अच्छी गुज़र रही थी बाकि सारे भयभीत उसके मारे जाने की ख़बर सुनने को बेताब।
कल फिर नये तरह की दवा लायी गयी रात को उससे आटे में मिलाया गया और सारी कवायत की गयी फिर हर एक कोने में जहाँ जहाँ उसके होने की या जाने की संभावना थी उस ज़हर को रखा गया और तरह से एक नन्ही और चंचल चहिये का आज सवेरे अंत हुआ घर में शांति का माहौल वापस बहाल हुआ।
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