सोमवार, 13 अप्रैल 2015

भारत में कम्युनिस्ट पार्टी का भविष्य 




आया ऊंट पहाड़ के नीचे, मौजूदा राजनैतिक हालात ने कम्युनिस्टों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया की अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता और यह सुकबुकाहट राजनैतिक गलियारों में सुनी जा रही थी की शायद भारत की समस्त कम्युनिस्ट पार्टी जो सर्वहारा, मज़दूर, भूमिहीन खेतियर मज़दूर, और मध्यवर्गीय समाज की हितैषी होने का दावा करती आयी है उन्हें आज बुर्जुआ, फर्सिस्ट, सांप्रदायिक शक्तियों के बढ़ते प्रभाव / कम्युनिस्टों का घटता जनाधार सता रहा है। अपने घटते जनाधार और भारत की राजनीती में घटता वर्चस्व कम्युनिस्ट पार्टी को यह सोचने पर विवश कर रहा है की यदि अपना जनाधार बचाना है तो भारत में ७२ फिरको में बटी कम्युनिस्ट पार्टी को एक झण्डे एक बैनर और एक नाम से भारत में दुबारा अपना वजूद क़ायम करना होगा। कम्युनिस्ट पार्टी के एकीकरण का ज़िम्मा भारत की माक्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने लिया और विशाखापटनम में चल रहे २१ वे अधिवेशन में सभी ७२ फिरको को न्यौता दिया है जो पहली बार देखने में आया है। यदि एकीकरण के मसौदे पर सारे फिरको की सहमति बनती है तो निश्चित तौर पर हम जैसे बुद्धिजीवी के लिये ख़ुशी की बात होगी और निश्चित रूप से कम्युनिस्ट पार्टी का जनाधार बढ़ना तय है और मौजूदा सरकार को एक मज़बूत चुनौती दे सकने में कामयाब भी होंगे। 
ईश्वर इन्हे सद्बुद्धि दे।

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