बाल्टिमोर V/S भारत
बाल्टिमोर, मेरीलैंड का हादसा क्या है जन्हा सरकार को आपातकाल घोषित करना पड़ा। १९ अप्रैल, फ्रेडी ग्रे काले-अमेरिकन की बाल्टीमोर पुलिस की हिरासत में था उसके हाथो में हथकड़ी थी जो हाथो को पीछे कर के लगायी गयी थी और पुलिस वैन में बिठा कर उसके पैरो को हथकड़ी लगा दी गयी। जब की अमेरिका में हथकड़ी लगे कैदी को कार की पिछली सीट पर बिठा कर सीट बेल्ट लगा दी जाती है जो इसके साथ नहीं की गयी; तेज़ रफ़्तार और ज़िग-ज़ैग ड्राइविंग से वो घायल हो गया और रीढ़ की हड्डी टूट जाने के कारण उसकी कस्टोडिअल डेथ हो गयी। २७ अप्रैल को उसके अंतिम संस्कार के बाद में, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पुलिस की बर्बरता के ख़िलाफ़ किया गया और विरोध प्रदर्शन करने वालो ने शहर भर में लूटपाट की और गोरे अमेरिकन के विभिन्न अनुष्ठानो को आग के हवाले कर दिया। हालात इतने बिगड़े की स्थानीय प्रशासन को आपातकाल की घोषणा करनी पड़ी।
उसके उलट हमारे देश में कस्टोडिअल डेथ एक रोज़ का मामूल है ४२ लोगो को पुलिस घर से उठा कर रात के अँधेरे में मार देती है २०-२५ की लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद भी अभियुक्त ब-इज़्ज़त बरी हो जाते है, चन्दन तस्कर बता के २० लोगो को मार दिया जाता है, आतंकवादी बता कर पांच लोगो को हथकड़ी लगा कर मार दिया जाता है और हमको गुस्सा नहीं आता। एक-दो दिन चर्चा फिर सब समान्य क्योकि हमारा जन्म देवभूमि पर हुआ है।
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