बुधवार, 19 अगस्त 2015


मोदी का विशेष पैकेज 




प्रधानमंत्री के द्वारा बिहार को दिये जाने वाले विशेष पैकेज की घोषणा जिस नाटकीय अंदाज़ में की गयी जैसे किसी प्रदेश की नीलामी हो रही हो जो संवेदनाहीन और राज्य के लोगो और सत्ता में बैठी सरकार का अपमान है। अफ़सोस की बात यह है की भीड़ में बैठे बिहार के रहवासी उत्साह से तालिया बजा रहे थे। बिहार ऐसा राज्य है जहाँ सवेरा होते ही लोगो का छोटा छोटा समुह चाय की दूकान पर चाय की चुस्की के साथ वहाँ मौजुद २-३ समाचार पत्रो को ध्यान से पढ़ राजनैतिक चर्चा का अंग बन जाता है। नीबू की चाय फूटपाथ के चाय के खोनचे की शान होती है जो हर वर्ग का आदमी पिता है, मेरे कहने का तात्पर्य यह है की हर बिहारी राजनैतिक रूप से सजग और सक्रिय है। दिया गये 1.25 लाख करोड़ रुपये के विशेष पैकेज लेकिन कोई समय सीमा या धन का संभावित स्रोत के ब्रेक अप सूचीबद्ध किया गया हो उसकी जानकारी नहीं दी गयी गयी है। रुपये 54,713 करोड़: एक सबसे बड़ा घटक राष्ट्रीय राजमार्गों पर किए गए वादे के अनुसार खर्च होना संभावित है। इससे पहले इस साल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से सहायता के रूप में रुपये 1.10 लाख करोड़ रुपये की मांग की थी (भाजपा को छोड़कर) एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने एक ज्ञापन प्रस्तुत किया था। इस विशेष पैकेज की घोषणा के साथ प्रधानमंत्री जी बिहार और बिहार के रहवासियो को ताना देना भी नहीं भूले उन्होंने बिहार को बीमारू राज्य की संज्ञा दी और कहा 'उनके (नीतीश कुमार के) मुँह चीनी और शहद से भरा हो सकता है। लेकिन एक आदमी बीमार नहीं है, तो वह क्यों वह चिकित्सक के पास जाना पड़ता है, मुझे बताओ? अगर बिहार में सब ठीक है, वह क्यों केंद्र सरकार से चीजों की मांग रखता है?"


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