गुरुवार, 8 दिसंबर 2016

कैशलेस एक घातक प्रयोग 





आतंकवाद, काला धन, और नकली प्रचलित मुद्रा पर आँकुश लगाने की नियत से शुरू की गयी नोटबंदी अपने मक़सद में असफलता का कृतिमान बनाती स्पष्ट रूप से दिख पड़ती है। आतंकवाद का आतंक बेतस्तूर जारी है, देश में प्रचलित अधिकांश मुद्रा बैंको में जमा हो गयी और कुछ लोगो या समुह की मिलीभगत से कुछ भ्रष्ट बैंक अधिकारियो की सहयता से काला धन सफ़ेद करने की कवायद ने अपनी पहचान बनायी। यह सरकारी दावा की नकली मुद्रा का अन्त होगा और अच्छे दिन आयेगे ने भी यह बता दिया की यह सब जुमला था, नये नोट के आते ही नकली नोटो की बड़ी बड़ी खेप पकड़ी गयी। कुल मिला कर यह कहना गलत न होगा की विमुद्रीकरण अपने मक़सद में बुरी तरह विफल रहा और इस बेतुके फैसले की राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अर्थशास्री एवं वित्तीय विशेषज्ञों के द्वारा आलोचना झेलने के बाद सरकार बचाव की मुद्रा में आयी और विमुद्रीकरण की पुरी कवायत को कैशलेस से जोड़ने के प्रति सक्रीय हो गयी। 

कैशलेस को हींग की गोली की तरह दिखाया जा रहा है, जिसे खाते ही बदहज़मी खत्म हो जाएगी। प्रधानमंत्री को कैशलेस की वकालत करनी पड़ी और एक जनसभा में बोलना पड़ा की उनके एक मित्र में बताया की अब तो भिखारी भी स्वपिंग मशीन रखते है। भारत को कैशलेस करना है और उसको बढ़ावा देना के उद्देश्य से प्रधानमंत्री स्वम् PayTM के ट्रेडमार्क राजदूत की भुमिका में PayTM के विज्ञापन में मुख्य अभिनेता की भूमिका में प्रकट हुए जो विवादों के घेरे में आयी। एक राष्ट्रीय विपक्षी दल के नेता ने तो यहाँ तक कह दिया PayTM अर्थात "पे टू मोदी"। भारत जैसे बहु विविध देश में जहाँ भाषा खान-पान ५० किलोमीटर पर बदल जाता है पूर्वावश्यकता का अभाव है बिजली ८-१० घण्टे आती है एटीएम १० किलोमीटर में एक होता है बैंक ब्लॉक/तहसील में पाये जाते है अधिकांश लोग प्लास्टिक मनी के बारे में बहुत कम जानते है ऐसे में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री का सपना साकार होता तो नही दिखायी देता बल्कि इससे अराजकता का जन्म अवश्य होगा। स्वपिंग मशीन की उपलब्धता तथा उसे प्राप्त करने की प्रक्रिया जटिलता से भरी है और जिस प्रकार प्रधानमंत्री की सार्वजनिक उद्घोषणा की हमे कैशलेस समाज की स्थापना करनी है एक भ्रमात्मक ब्यान के सिवा कुछ नही है आम भारतीयों की अज्ञानता को भुनाने का एक सुनियोजित प्रयास लगता है जो नोटबंदी से ध्यान हटाने की दिशा में एक कोशिश मात्र है। नोट बंदी से कुछ नही होने वाला, यह सिर्फ आम जनता पर बोझ है।

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