शनिवार, 15 अगस्त 2015

प्रधानमंत्री के भाषण की ग्यारह ख़ास बातें…


१. सांप्रदायिक सद्भाव पर ज़ोर - हमारी एकता, हमारी सरलता, हमारा भाईचारा और हमारा सद्भाव ये हमारी बहुत बड़ी पूंजी है। इस पूंजी को कभी दाग़ नहीं लगना चाहिए, कभी चोट नहीं पहुँचनी चाहिए। 
वास्तविकता क्या है : कोई दिन ऐसा नहीं गुज़रता जिस दिन बीजेपी और उसके सहयोगी संघटन समाज के विघटन का प्रयास न करते हो, सांप्रदायिक सद्भाव को बिगड़ने के भरपूर प्रयास किया जा रहा है। लोग समझदारी से काम ले रहे है सोशल मीडिया विदेशी मीडिया सक्रीय है कोई बड़ी वारदात को अन्जाम देने में यह सफल नही हो पाये है। 

२. टीम इंडिया से बढ़ रहा है देश - सवा सौ करोड़ देशवासी जब टीम बन जाते हैं तो वो राष्ट्र को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाते हैं, राष्ट्र को बढ़ाते हैं, राष्ट्र को बनाते हैं और राष्ट्र को बचाते भी हैं। 
वास्तविकता क्या है: आम नागरिको को सरकारी परियोजना से जोड़ने में असफल रही सरकार। विसिलब्लोवर, सुचना के अधिकार कानून को कमज़ोर किया, जन-हित परियोजनाओं को प्राथमिकता की सूचि से बहार किया जैसे मनरेगा, खाद्य सुरक्षा बिल इत्यादि। बीमार और कमज़ोर टीम के भरोसे दुनिया फ़तेह करने निकले है जिसमे हार निश्चित है। 

३. देश के मन की बात - जनभागीदारी के ज़रिए देश के मन की बात सरकार तक पहुँच रही है माइगोव डॉट इन (MYGOV.IN), मन की बात और पत्रों के ज़रिए दूर दराज़ बैठे लोगों के सुझाव भी सरकार तक पहुँच रहे हैं। 

वास्तविकता क्या है: अपना मन हल्का करने में सफल परन्तु देश की बात जस की तस। 

४. जनधन योजना, बीमा योजना और पेंशन योजना - विश्व में फाइनेंसियल इंक्लूज़न की जो बात होती है उसे एक मज़बूत धरातल पर अगर लाना है तो देश के ग़रीब से ग़रीब व्यक्ति को अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। 

वास्तविकता क्या है: विशेषज्ञ की माने तो यह योजना पूर्णरूप से फ्लॉप है। ग्रमीण बैंको को कलेक्टर के द्वारा दिये गये टारगेट के मुताबिक बैंक का मैनेजर जबरन इन टारगेट की पूर्ति करता नज़र आता है।  देखने और सुनने में यह भी आया है की मैनेजर ने अपने पास से पैसे लगा कर अपने टारगेट की पूर्ती की है कारण उनकी वार्षिक बढ़ोतरी को टारगेट से जोड़ दिया गया है। 

५. श्रम क़ानूनों में सुधार - मज़दूरों को पीएफ़ खाते के लिए एक पहचान नंबर दिया। ४४ श्रम क़ानूनों को चार आचार संहिताओं में समेटा
वास्तविकता क्या है: श्रम कानून को लचर बनाया गया मज़दूरों के हितो की अनदेखी। 

६. एलपीजी सब्सिडी - बीस लाख लोगों ने एलपीजी सब्सिडी छोड़ी है। हम एलपीजी सब्सिडी के लिए डायरेक्ट बेनिफ़िट का प्रावधान लाए हैं जिससे दलाली और कालाबाज़ारी ख़त्म हुई है। 

सब्सिडी से बचे पैसो का इस्तेमाल कैसे और किस मत में हुआ जानकारी दे सरकार। 

७. कोयले की नीलामी - अगर मैं कोयला की चर्चा करूंगा तो कुछ राजनीतिक पंडित उसे राजनीति के तराजू से तोलेंगे। मैं जिस कोयले की चर्चा कर रहा हूँ उसे राजनीति से मत तोलिए।  हमने कोयले की नीलामी का प्रावधान किया और क़रीब तीन लाख करोड़ रुपए अब तक नीलामी से जुटाए हैं। 

८. भ्रष्टाचार नहीं हुआ - हमारी पंद्रह महीनों की सरकार पर अब तक भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है। कालेधन पर हमने कठोर क़ानून बनाया है और लोगों ने अब तक ६५०० करोड़ रुपए की अघोषित आय घोषित की है। 
वास्तविकता क्या है: व्यापम, ललित मोदी घोटाला, चिक्की घोटाला, छत्तीसगढ़ का नमक और चावल घोटाला यह सब उपलब्धि किसकी है इस पर भी कुछ प्रकाश डालते मगर चुप रहना उचित समझा। 

९. कृषि मंत्रालय में किसान कल्याण जोड़ा : हमने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए पचास हज़ार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।  कृषि मंत्रालय अब कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के रूप में जाना जाएगा। 

वास्तविकता क्या है: किसान मरते रहे और आप और आपका मंत्रालय सोता रहा। किसानो की आत्महत्या में ४०% का इज़ाफ़ा दर्ज हुआ है जो पिछले सालो के अनुपात में बहुत अधिक है और सब अधिक प्रभवित राज्य महाराष्ट्र है। इस पर आपकी प्रतिक्रिया क्या है प्रधानमंत्री जी। 

१०. वन रैंक वन पेंशन - पूर्व सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन का विषय हमारी सरकार के सामने हैं।  मैं विश्वास दिलाता हूँ कि सिद्धांततः इस सरकार ने वन रैंक वन पेंशन को स्वीकार कर लिया है।  संबंधित लोगों से बात चल रही है, बात को आगे बढ़ा रहे हैं। 
वास्तविकता क्या है: आंतरिक सुरक्षा के नाम पर धरने पर बैठे अपने पूर्व सैनिको के साथ अभद्र व्यवाहर अपने चुनावी वादे से पीछे हटना क्या फौज के मनोबल को गिराने के लिये काफी नहीं है। आज भी असमंजस की स्थिति बनी है और सैनिक फूटपाथ पर। 

११. स्टार्ट अप इंडिया-स्टैंड अप इंडिया - हमें भारत को स्टार्टअप्स में नंबर एक बनाना हैं। बैंक नए उद्यमियों को आसान क़र्ज़ देंगे।  देश की सवा लाख बैंक शाखाएं दलितों-वंचितों के लिए विशेष योजनाएं बनाएंगी। देश में सवा लाख दलित उद्यमी पैदा किए जाएंगे।  उन स्टार्टअप प्रोजैक्ट को अधिक मदद दी जाएगी जिनसे अधिक रोज़गार पैदा होंगे। 

वास्तविकता क्या है: दलित धर्म परिवर्तन कर रहे है असुरक्षित महसूस कर रहे दरिद्रता की अंतिम सीमा में जीवन यापन कर रहे है दबंगो के द्वारा उनकी बेटी और महिलाओ का शोषण हो रहा है सरकारे और स्थानीय प्रशासन निष्क्रिय है मुक़दमे दर्ज नहीं होते दर्ज हो भी जाये तो मुजरिमो को सज़ा नहीं होती। आप देश में सवा लाख दलित उद्यमी पैदा करने की बात करते है। क्या सरकार के पास कोई योजना है या यह भी एक चुनावी जुमला है। 

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