क्या है बाबा की तरक्की का राज़?
बाबा एक शक्ति का केंद्र है, उसके पहले घेरे में पूंजीपति, सरकार के बड़े अफसर, रसूकदार लोग और नेता होते है। दूसरा घेरा उनका होता है जो पहले घेरे वालो के आश्रित होते है। तीसरा घेरा अपना ट्रांसफर पोस्टिंग, रिश्वत में फसे लोग, भगोड़े, कानून के मुजरिम और शराब के ठेकेदारो - उत्खनन माफिया का होता है। यह सब मिल कर एक कड़ी बनाते है और उसका नाभिक केंद्र बाबा होता है। चौथा और आखरी घेरा भक्तो और श्रदालु लोगो का होता है जो बाबा की प्रसिद्धि और उनके धर्मोपदेश / प्रवचन से प्रभावित होकर अपने को समर्पित कर देते है और यह एक बड़ी भीड़ का हिस्सा होते है जो किसी न किसी चमत्कार की आस में अपने सारे काम को छोड़ हर प्रवचन में दिखाई देते है।
बाबा अपने चौथे और आखरी घेरे को अपने साथ बनाये रखने के लिये विभन्न प्रकार का आडंबर करता है जिसे भक्त चमत्कार के रूप में लेते है और इतना समर्पित होते है की बाबा के द्वारा छोड़े गये भोजन और चाय को भी आपस में बाट कर खा जाते है इस विश्वास के साथ की उनके दुखो का निवारण होगा। बाबा को इस घेरे से आमदनी नाममात्र ही होती है मगर इनका हुजूम उसकी लोकप्रियता में चार-चाँद लगता है।
बाबा की असली आमदनी का स्रोत पहले तीन घेरे से आता है यही कारण है की बाबा को आपने जीवन काल में सत्ता और पूजीपतियों का निरंतर सहयोग मिलता रहता है और उसकी अकूत सम्पति दिन दूनी रात चौगनी बढ़ती रहती है। पतन उस समय शुरू होता है जब सत्ता अपना मुह फेर लेता है।
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