रविवार, 2 अगस्त 2015

"हिन्दू आतकवाद" का जन्म और पहली बार इसका प्रयोग कब हुआ 


संसद में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के दिये बयान ने हंगामा खड़ा कर दिया जब उन्होंने यह कहाँ की "हिन्दू आतकवाद" नामक शब्द ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को कमजोर किया था, और इसकी ज़िम्मेदार पिछली संप्रग सरकार है। बहुत कम लोगो को पता होगा की "हिन्दू आतंकवाद" की उत्पति कब हुई किसने की और पहली बार इस शब्द का प्रयोग किस सन्दर्भ में किया गया। ज्ञात हो बाबरी मस्जिद विध्वंस के उपरान्त न्यायमूर्ति लिब्रहान, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के तत्कालीन एक वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता एक आयोग का गठित किया गया था जो बाबरी मस्जिद विध्वंस प्रकरण की जाँच कर रहा था। आयोग के न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मनमोहन सिंह लिब्रहान पहली बार अपनी रिपोर्ट में यह शब्द "हिंदू आतंकवादियों 'का इस्तेमाल बाबरी मस्जिद विध्वंस के सन्दर्भ में किया वह कहते है "हाँ मैंने अपनी रिपोर्ट में 'हिंदू आतंकवादियों' शब्द का उल्लेख किया है। मैंने बहुत विचार किया कि इस शब्द की जगह किसी दूसरे उपयुक्त शब्द का प्रयोग करू परन्तु मैं ऐसा नहीं कर पाया। मैं एक राजनीतिज्ञ नहीं हूँ, न्यायमूर्ति लिब्रहान कहते हैं "किसी तरह का आतंकवाद खराब है। निर्दोष लोगों की हत्या बुरा है। न्यायमूर्ति लिब्रहान, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के तत्कालीन एक वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित आयोग को दिसंबर १९९२ में नियुक्त किया गया था और २००९ में १७ साल के बाद आयोग ने केंद्र सरकार को,अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमे १००० पन्ने में अपनी तफ्तीश और सिफारिशें है अफ़सोस किसी भी सरकार ने दोषियों को सज़ा देने में रूचि नहीं ली। उनका यह कहना की वर्त्तमान राजस्थान के राजपाल इस घटना की मुख्य भूमिका में थे और आज संवैधानिक पद पर आसीन है। वह यह कहने में भी नहीं चुके की यही हशर जस्टिस श्री कृष्णा कमीशन रिपोर्ट का हुआ जो मुंबई दंगो के बाद गठित की गयी थी।

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