६ ऐसी चीज़े जिससे पकड़ा गया आतंकवादी मंदबुद्धि प्रतीत होता है
उस्मान उम्र २० वर्ष, लश्कर-ए-तैयबा का संदिग्ध आतंकवादी जो एक मुठभेड़ के उपरान्त ज़िन्दा पकड़ा गया जो जम्मू&कश्मीर के उधमपुर ज़िले में सम्पन हुआ जिसमे बोडर सिक्योरिटी फ़ोर्स के २ जवानो ने शाहदत पेश की एवं ११ व्यक्ति घायल हुए। पकडे जाने के तुरन्त बाद उसने अपना पहला परिचय क़ासिम खान के रूप में करवाया फिर उस्मान के रूप में। उस्मान की गिरफ्तारी पुलिस और आर्मी के साझा तलाश के दौरान एक स्कूल से हुई। टीवी पर दिये अपने इंटरव्यू में ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वह इस अवसर की तलाश में था उसकी बाते, हुलिया आतंकवादी की छवि को ठेस पंहुचा रही थी वह खुश था जैसे उसे मौके की घंभीरता का अंदाज़ा न हो या मानसिक रूप बीमार हो। ऐसे ६ अवसर थे जिसमे ऐसा अहसास हुआ की वह मानसिक रोगी/सही दिमाग नहीं है।
१. क्या उसे अपना नाम पता नहीं था? पकडे गये आतंकी ने तीन बार अपना नाम बदला पहले उसने अपना नाम क़ासिम खान बताया फिर उस्मान और अंत में मुहम्मद नावेद। खुदा बेहतर जानता है क्या है उसका असली नाम और पहचान।
२. शरीर की भाषा और ड्रेस कोड: उसकी शीतलता ऐसा प्रतीत होता है की वह पुरे घटना क्रम से भयभीत न होकर उस से मज़ा ले रहा है। उसे अपने किये गये कृत के प्रति कोई पश्चाताप नहीं है ऐसा तभी मुमकिन है जब इंसान मानसिक रोगी हो। आतंकवादी लगने के बजाय वो क्लास में पीछे की बेंच पर बैठा एक शरारती युवक लग रहा था जो इम्तेहान बिना पढ़े देने आया हो। इसको देखते हुए पाकिस्तान के आतंकियों के गिरते स्तर पर हसी आना स्वाभाविक है। कमीज़ का ऊपर वाला बटन खुला मुड़ी हुई कमीज़ की आस्तीन हास्यपूर्ण लग रही थी।
३. पहली अभिव्यक्ति: वीडियो चालू होते ही किसी व्यक्ति ने सवाल किया "आज थोड़ी आया है तू पाकिस्तान से" उस आतंकी के भाव से ऐसा प्रतीत हुआ जैसे उस सवाल की कोई अहमियत न हो जैसे माँ पूछ रही हो बेटा पढ़ाई कर ली कल के टेस्ट की और बेटा गुस्से से भरा हुआ अपनी माँ की ओर देखे। फिर वह जवाब देता है "१२ दिन हो गये"
४. कुल आतंकियों की संख्या : जब रिपोर्टर ने पूछा "तुम कितने लोग थे?" उसका जवाब "दो ही थे" स्टाइलिश तरीके से उसका जवाब। फिर झटके से पीछे मुड़ता है जैसे सहमति ले रहा हो की "दो ही थे न" फिर बोला "नहीं दो ही थे"
५. तुम्हारी हमसे दुश्मनी क्या है? जब पूछा "क्यों करते है यह आप" उसका जवाब "छोड़ो आप" जब रिपोर्टर ने फिर पूछा "क्या आप को पैसा मिलता है" उसने अपने दाहिनी ओर बैठे व्यक्ति की तरफ देखा और मुस्कुराते हुए बोला "यह तो अल्लाह का काम है"
६. रिपोर्टर ने कहा "दिहाड़ी लगा लो" इस सवाल पर आतंकी मुस्कुराया और बोला "दिहाड़ी? दिहाड़ी क्या लगाये ?" और मज़ाकिया तरीके से बोला "तो मारना ही मारना है"
उसके हाव भाव से ऐसा लगता है की पुलिस और सिक्योरिटी एजेंसी के लिये उस आतंकी से तफ्तीश करना एक मुश्किल काम होगा सम्भवता हसते हसते वह कूदने फांदने लगे। मगर एक बात वीडियो देख कर लगता है की आतंकियों का स्तर गिरा है और हाफिज सईद भी इससे निराश होगा।
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